चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका में मोहाली के एक गांव में पंचायती ज़मीन पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई और अनधिकृत निर्माण का आरोप लगाया गया है।
गिद्दड़पुर गांव के 60 वर्षीय किसान सुरजीत सिंह ने याचिका दाखिल की है। याचिका के अनुसार विवादित भूमि का अप्रैल 2021 में विभाजन किया गया था जिसका दो-तिहाई हिस्सा पशुपालन विभाग को और एक-तिहाई हिस्सा ग्राम पंचायत को आवंटित किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 5 नवंबर, 2024 को उजागर सिंह ने पंचायत सदस्यों के साथ मिलीभगत कर पंचायत की जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले 200 से ज्यादा परिपक्व पेड़, जिनमें से कुछ 15 साल से भी ज्यादा पुराने थे, काट दिए। उनका तर्क है कि इस कृत्य ने न केवल महत्वपूर्ण वृक्षावरण को नष्ट किया बल्कि कई पर्यावरणीय कानूनों का भी उल्लंघन किया जिससे जैव विविधता को नुकसान पहुंचा।
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि ग्राम पंचायत प्रशासक की ओर से 12 नवंबर, 2024 को निर्माण रोकने का नोटिस जारी करने और उसके बाद पुलिस व वन अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट को बताया गया कि जुलाई में पारित एक आदेश में 115 पेड़ों की कटाई की बात स्वीकार की गई और वन रेंज अधिकारी को नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया गया। हालांकि, आज तक कोई आकलन या कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। याचिका में एमसी मेहता बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला दिया गया है जिसमें अवैध रूप से काटे गए प्रत्येक पेड़ पर न्यूनतम एक लाख रुपये का जुर्माना और नुकसान हुए पेड़ों की संख्या के दस गुना अधिक प्रतिपूरक और दंडात्मक पौधरोपण का आदेश दिया गया है।