संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप, उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करने की तैयारी
ग्रेटर नोएडा (संवाद)। किसान संघर्ष मोर्चा से जुड़े नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात किए जाने का किसान नेताओं ने विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वीआईपी के आगमन या किसी अन्य स्थान पर आंदोलन की आशंका के नाम पर पुलिस बार-बार किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद करने जैसी कार्रवाई करती है। इससे नागरिकों की स्वतंत्रता और निजता के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. रूपेश वर्मा ने बताया कि शुक्रवार सुबह से उनके घर के अलावा सोरन प्रधान, सुखबीर खलीफा और किसान सभा, किसान परिषद व किसान एकता संघ से जुड़े अन्य नेताओं के घरों पर भी पुलिस तैनात कर दी गई। उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा की ओर से जंतर-मंतर या जनपद में कहीं भी आंदोलन का एलान नहीं किया गया था। इसके बावजूद पुलिस तैनात करने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि किसान नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और आंदोलन की आवाज दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने भी पुलिस की कार्रवाई की निंदा की। किसान परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सचिन ने कहा कि नागरिकों की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन के मामले में उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।