डॉक्टरों का दावा, शहर में पहली बार वाटर वेपर रीजूम थेरेपी से किया गया इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-62 स्थित एक निजी अस्पताल में 69 वर्षीय पूरन सिंह मेहरा के बढ़े हुए प्रोस्टेट (ग्रेड 3) का इलाज पानी के भाप (वाटर वेपर रीजूम थेरेपी) से किया गया। कुछ समय पहले तक ये थेरेपी केवल अमेरिका व यूरोप के देशों में ही उपलब्ध थी।
यह नोएडा का पहला मामला है, जिसमें इस तकनीक का सफल उपयोग किया गया। फोर्टिस अस्पताल के यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के निदेशक डॉ शैलेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि पूरन सिंह कई महीनों से बार-बार पेशाब आने, पेशाब के धीमे बहाव और रात में कई बार उठने जैसी तकलीफों से परेशान थे। वे सर्जरी से बचना चाहते थे, क्योंकि उनकी उम्र के हिसाब से ब्लीडिंग, इन्फेक्शन, स्ट्रिक्चर, सेक्सुअल डिस्फंक्शन जैसे जोखिम अधिक थे। वह 16 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुए और 17 अप्रैल को उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। रीजूम एक मिनिमल इनवेजिव प्रक्रिया है, जिसे लोकल एनेस्थीसिया के तहत डे-केयर मोड में किया जा सकता है। इसमें किसी चीरे की जरूरत नहीं होती। एक पतले सिस्टोस्कोप के जरिये पेशाब की नली के रास्ते प्रोस्टेट ग्रंथि तक पहुंचकर उसमें स्टेराइल पानी की भाप के 6 से 8 इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिससे प्रोस्टेट के ऊतक धीरे-धीरे सिकुड़ कर समाप्त हो जाते हैं और मूत्र मार्ग खुल जाता है।