सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन तक लाइट मेट्रो चलाने की तैयारी
नोएडा। ‘नोएडा-ग्रेेटर नोएडा के बीच एक्वा लाइन के सेक्टर-142 मेट्रो स्टेशन से ब्लू लाइन के बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन तक लाइट मेट्रो चलाने की तैयारी है। सामान्य मेट्रो के अलावा लाइट मेट्रो का विकल्प भी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में रखा जा रहा है। डीपीआर तैयार होने के बाद इसे केंद्र और राज्य सरकार को भेजा जाएगा।’ एनएमआरसी की एमडी रितु माहेश्वरी ने बृहस्पतिवार को सेक्टर-29 स्थित एनएमआरसी के नए कार्यालय और वेबसाइट की री-लाचिंग के मौके पर यह बातें कहीं।
उन्होंने बताया कि इस रूट के लिए 2016 में एक डीपीआर बनी थी, लेकिन अब इसे नये सिरे से तैयार किया जा रहा है। केंद्र की ओर से लाइट मेट्रो के विकल्प तलाशने के निर्देश दिए गए थे। लिहाजा, इसी कड़ी में सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन तक के रूट पर लाइट मेट्रो के विकल्प को रखा जा रहा है। लाइट मेट्रो से बजट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह पुराने बजट में ही लाई जा सकती है। संभव है कि बजट पहले से कम भी हो। इसके अलावा सेक्टर-71 से नॉलेज पार्क तक मेट्रो के एक्सटेंशन के तहत पहले फेज की डीपीआर राज्य सरकार से संस्तुति के इंतजार में है। इसके बाद इसे केंद्र को भेजा जाएगा। बाद में दूसरे फेज की डीपीआर भेजी जाएगी। इस मौके पर एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक पीडी उपाध्याय, जीएम (तकनीकी) मनोज वाजपेयी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सेक्टर-51-52 मेट्रो स्टेशनों को स्काईवॉक के लिए करना होगा इंतजार
अधिकारियों के मुताबिक, एक्वा लाइन के सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन और ब्लू लाइन के सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन को स्काईवॉक से जोड़ने का प्रस्ताव था। इस बाबत प्राधिकरण की कामर्शियल प्लॉट का आवंटन आईकिया कंपनी को किया गया है। बिड में ही स्काईवॉक बनाने की शर्त थी, लेकिन आईकिया का प्रोजेक्ट सात वर्ष में तैयार होगा। लिहाजा, प्राधिकरण की ओर से आवंटी से स्काईवॉक जल्दी बनाने की अपील की गई है। हालांकि इस बाबत अभी कंपनी की ओर से कोई समय सीमा नहीं दी गई है।
मेट्रो और सिटी बस को घाटे से उबारने की कवायद
अधिकारियों के मुताबिक, मेट्रो और सिटी बस को घाटे से उबारने और यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर काम चल रहा है। इस कड़ी में सेक्टर-51 और 52 के बीच बने पाथवे के कॉरिडोर पर ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं। वहीं, एक्वा और ब्लू लाइन के यात्रियों के लिए सिंगल टिकट पर काम चल रहा है। हालांकि, एक से डेढ़ साल में यह काम हो पाएगा। यात्रियों को सुविधा दिलाने के लिए आठ मेट्रो स्टेशनों पर ई-साइकिल स्टैंड बनाए जा रहे हैं। वहीं, प्राधिकरण के माध्यम से 60 अन्य स्टैंड अलग-अलग स्थानों में बनेंगे। मेट्रो स्टेशनों को सोसाइटियों से जोड़ने के लिए प्रयास हो रहे हैं। मेट्रो में विज्ञापनों के लिए टेंडर फाइनल हो चुका है। करीब एक करोड़ रुपये सालाना का फायदा होगा। परी चौक और सेक्टर-76 को पिंक स्टेशन बनाया जाएगा।
सिग्नलिंग सिस्टम फेल होने की होगी जांच
एनएमआरसी का एटीएस सिस्टम बुधवार को फेल होने के बाद संबंधित एजेंसी को लिखा गया है। भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए निर्देश दिया गया है। जांच के बाद इस पर कार्रवाई की बात एमडी ने कही।
एनएमआरसी की वेबसाइट की खासियत
- जर्नी प्लानर के माध्यम से एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाने में समय और धनराशि का पता चलेगा।
- पैसेंजर को एनएमआरसी की योजनाएं और भविष्य के लिए करियर संबंधी जानकारी मिलेगी।
- पेमेंट गेटवे आदि की जानकारी मिलेगी।
- वेंडर रजिस्ट्रेशन के लिए भी जगह होगी।
- वेबसाइट से भर्तियों में फर्जीवाड़े से आगाह किया गया है।
- नई परियोजनाओं व दूसरे अन्य लिंक।
- टेंडर की जानकारी।
सामान्य और लाइट मेट्रो में अंतर
सामान्य मेट्रो के कोच छह से आठ तक होते हैं। वहीं, लाइट मेट्रो के कोच ज्यादा से ज्यादा तीन तक होंगे। इसकी कीमत सामान्य मेट्रो से काफी कम होगी। इसे चलाने के लिए छोटे-छोटे रूट पर फोकस किया गया है। जबकि सामान्य मेट्रो काफी लंबी दूरी तक जाती है।