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जिले में लंबे समय बाद भी नहीं भरे उर्दू शिक्षकों के पद

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Posts of Urdu teachers not filled even after a long time
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नूंह (अंतराम खटाना)। जिले में लंबे समय बाद भी सरकार द्वारा उर्दू शिक्षक के खाली पड़े पदों को नहीं भरा जा रहा है। जिले के शिक्षाविदें ने इस मांग को हर मंच पर उठाया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के कारण लोगों में भारी रोष पनप रहा है। हरियाणा सरकार ने सात साल पहले नूंह जिले के स्कूलों में 544 उर्दू अध्यापक लगाने के आदेश दिए थे लेकिन मात्र 75 ही नियुक्त किए। उर्दू में जेबीटी और बीएड पास छात्र तभी से उर्दू अध्यापकों की भर्ती की मांग कर रहे हैं।
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मेेवात में करीब 80 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इसको देखते हुए 2012 में प्रदेश सरकार ने जिले में 544 उर्दू अध्यापकों के आवेदन मांगे थे। सरकार ने 217 अध्यापकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया था, जिसके बाद 75 उम्मीदवारों का चयन किया गया। इनमें 469 पद खाली रह गए थे। 56 उम्मीदवारों ने इस भर्ती के खिलाफ कोर्ट में केस कर दिया था। जोकि अभी भी अदालत में विचाराधीन है। तब से लेकर आज तक ये पद रिक्त पडे़ हुए हैं। लोगों ने हरियाणा सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि इन पदों पर जल्द ही भर्ती मंजूर की जाए, ताकि यहां के लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही बच्चों को उर्दू की शिक्षा भी मिल सके। इसके अलावा उन्होंने जिले के महाविद्यालयों में उर्दू के सहायक प्रोफेसर नियुक्त करने की मांग को भी उठाया।
शिक्षा के मामले में पिछड़ रहा जिला
तंजीम फरोग-ए-उर्दू मेवात अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद जुनैद, यासीन मेव डिग्री कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर नसरुद्दीन अजहर, अब्दुल नाफे, असगर अली, उपाध्यक्ष राशिद अमीन, मुफ्ति तारीफ, अरशद जमाल, अशरफ टांई व सचिव इमरान ने बताया कि जिला शिक्षा के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। यहां के अधिकतर अभिभावक बच्चों को उर्दू की शिक्षा दिलाना चाहते हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में उर्दू के शिक्षक न होने के चलते उनका दाखिला नहीं करा पाते हैं। बच्चों को उर्दू पढ़ाने की चाह में लोग मदरसों में भेजते हैं।
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मांगे नहीं मानने पर होगा आंदोलन
जिले के सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की भर्ती निकलवाने की मांग को लेकर तंजीम फरोग-ए-उर्दू मेवात द्वारा हर खंडों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को उर्दू बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लोगों का कहना हैं कि उर्दू उनकी जुबान है जिसे बचाने के लिए हर हाल में सरकार को रिक्त पदों पर नियुक्ति करनी होगी। अगर सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया तो सरकार के खिलाफ वह आंदोलन करने से भी नहीं चूकेंगे।
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