500 बेड के जिम्स में लंग कैंसर के बेहतर उपचार की व्यवस्था नहीं
नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। 500 बेड के जिम्स में लंग कैंसर के बेहतर उपचार की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में हर माह लंग कैंसर से करीब 10 से 12 मरीज पहुंचते हैं। जांच के बाद मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां भी लंग कैंसर के मरीजों का इलाज संभव हो पाएगा। कैंसर के इलाज की सुविधाओं को लेकर शासन से मांग की गई है। अगले वर्ष तक जिम्स में लंग कैंसर की सुविधा शुरू होने की संभावना है।
जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि इलाज की व्यवस्था के लिए शासन से मांग की जाएगी। अगले वर्ष तक जिम्स में भी लंग कैंसर के इलाज की सुविधाएं होने की संभावना है।
रेस्पिरेटरी मेडिसन की एडिशनल निदेशक डॉ. तनुश्री गहलोत का कहना है कि हर माह 15-20 कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। यह समस्या 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में मिल रही है। 20 फीसदी ऐसे लोग होते हैं जो धूम्रपान नहीं करते हैं।
लक्षण
लगातार खांसी का आना, भूख की कमी से वजन गिरना, खांसी के साथ बलगम में खून आना, काले रंग का बलगम आना, धीरे-धीरे आवाज का बैठना या बदलना लंग कैंसर के प्रमुख लक्षण है।
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प्रदूषण बढ़ा रहा लंग कैंसर के मरीज
डॉक्टर बोले-धूम्रपान और वायु प्रदूषण से फेफड़ों में सूजन हो रही है, इससे कैंसर का खतरा ज्यादा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फेफड़े का कैंसर सिर्फ धूम्रपान से नहीं होता, इसकी वजह वायु प्रदूषण, इनडोर स्मोक, पारिवारिक इतिहास और कुछ औषधियां भी हो सकती हैं। दिल्ली-नोएडा जैसे प्रदूषित शहरों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
धूम्रपान और वायु प्रदूषण से फेफड़ों में सूजन हो रही है। इससे कैंसर खतरा का बढ़ सकता है। डॉ. ज्योति आनंद बताती हैं कि 70 से 80 प्रतिशत कैंसर में धूम्रपान मुख्य वजह होता है। अब स्मोकिंग न करने वाले भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर के लिए लगातार गंभीर खतरा बना हुआ है। यह फेफड़ों में सूजन पैदा करता है जिससे कैंसर विकसित हो सकता है। वायु प्रदूषण कुछ विशेष आनुवंशिक बदलावों (म्यूटेशन) को भी ट्रिगर करता है जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका। कैंसर शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। हालांकि 80 से 90 प्रतिशत मरीज तब आते हैं जब कैंसर एडवांस या लाइलाज स्टेज में पहुंच चुका होता है।
युवा भी हो रहे शिकार
डॉ. ज्ञानेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि पहले यह बीमारी 55-60 साल की उम्र के लोगों को होती थी। अब 30 से 40 साल के युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। युवाओं में लंग कैंसर के मामलों की प्रतिशत जानकारी उपलब्ध नहीं है। लंग कैंसर के मुख्य कारणों में धूम्रपान, सेकेंड-हैंड स्मोकिंग, वायु प्रदूषण और आनुवंशिक प्रवृत्तियां शामिल हैं। बचाव के लिए धूम्रपान न करना और वायु प्रदूषण से बचना महत्वपूर्ण है।
प्रमुख कारण
वायु प्रदूषण, एस्बेस्टस के संपर्क में आने से मेसोथेलियोमा (एक प्रकार का लंग कैंसर) होता है। आनुवंशिक प्रवृत्तियां, धूम्रपान करने वाले और उनके पास खड़े या बैठने वाले भी लंग कैंसर की चपेट में आ सकते हैं। कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआं भी इसका कारण बन सकता है।
बचाव के तरीके
- वायु प्रदूषण से बचना
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाना
-धूम्रपान और गुटखे का सेवन न करें।
- घरों में चूल्हे के धुएं से बचाव के उपाय अपनाएं।
- भोजन में प्लास्टिक और केमिकलयुक्त उत्पादों के इस्तेमाल से परहेज करें।
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