-नोएडा में नौ लोगों की तीन टीमों पर शहर की निगरानी की जिम्मेदारी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में प्रदूषण बढ़ रहा है, लेकिन धूल पर लगाम लगाने के लिए निगरानी करने वाले अमले की संख्या नहीं बढ़ी। दूसरी तरफ निर्माण स्थलों पर 90 कैमरे लगाने के बावजूद नियमों का उल्लंघन सामने आ रहा है। नौ कर्मचारियों की तीन टीमों के जिम्मे शहर की निगरानी है। वहीं विभागों का आपसी तालमेल न होने से भी प्रदूषण की रोकथाम बड़ी चुनौती है।
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से सिर्फ अक्तूबर में करीब 30 परियोजना स्थलों के निरीक्षण के दौरान खामी पाई गई। इन पर टीम ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। अब उसे वसूलने की भी तैयारी है। ग्रेप-वन लगने के दौरान यही कार्रवाई 16 परियोजनाओं तक सीमित थी, लेकिन इससे साफ है कि टीमें निरीक्षण करने में जुटी हुई हैं।
यूपीपीसीबी के अधिकारियों के अनुसार, नोएडा को तीन जोन में बांटा गया है। इनमें सेक्टर-1 से 62 तक पहला जोन, दूसरा जोन सेक्टर-53 से 125 तक और तीसरा जोन सेक्टर 125 से 168 तक है। प्रत्येक के लिए तीन टीमों को एक-एक नोडल अधिकारी की देखरेख में तैनात किया गया है। हर टीम में अधिकारी समेत कुल तीन-तीन लोग हैं। सवाल है कि 10 लाख से ज्यादा वाली आबादी के बीच चल रहे 11000 से ज्यादा उद्योगों और उनके बीच भी चल रहीं 30 से ज्यादा बड़ी निर्माणाधीन परियोजनाओं की निगरानी सिर्फ नौ लोगों के जिम्मे कैसे संभव है।
90 कैमरों से चल रही निगरानी, 23 पीटीजेड कैमरे कंपनियों पर
यूपीपीसीबी की ओर से जारी निर्देश के तहत 90 कैमरों के जरिये निर्माण स्थल पर जानकारी को रिकॉर्ड किया जा रहा है। दूसरी तरफ कुछ हद तक प्रदूषण फैलाने वाली 23 फैक्ट्रियों पर पीटीजेड कैमरे के जरिए निगरानी जारी है। अब हर पांच किलोमीटर के दायरे की निगरानी और सख्त हो, इसके लिए चार नए निगरानी स्टेशन भी बढ़ाए जा रहे हैं।
विभागों के बीच तालमेल की चुनौती बरकरार
पिछले साल यूपीपीसीसी के पास यह अधिकार था कि प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना लगा सकते थे, लेकिन वसूली का कामकाज नोएडा प्राधिकरण के पास रहा। लेकिन जब पिछले साल लगाए गए करोड़ों जुर्माने को वसूला नहीं जा सका तो अब वसूलने का अधिकार भी संशय में है।
पांच टीमों पर वाहनों का प्रदूषण रोकने का जिम्मा
नोएडा के परिवहन विभाग के पास कुल पांच प्रवर्तन की टीमें हैं। इनमें तीन प्रवर्तन दल के दस्ते और दो पीटीओ के दस्ते शामिल हैं। यह टीमें सिर्फ नोएडा नहीं, बल्कि पूरे शहर में प्रदूषण बढ़ा रहे वाहन चालकों पर कार्रवाई करने का जिम्मा रखते हैं।
प्रशासन की नो पीयूसीसी नो फ्यूल व्यवस्था भी फेल
जिला प्रशासन के अंतर्गत जिला पूर्ति अधिकारी की देख-रेख में एक अक्तूबर से प्रदूषण की रोकथाम करने के लिए वाहनों को नो पीयूसीसी नो फ्यूल के तहत उन्हें सीमित करने का प्रयास था। इसके लिए बकायदा जांच एप बनाया गया, पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे लगवाने की बात हुई, 114 में से सिर्फ 16 पेट्रोल पंपों पर ही एएनपीआर कैमरा लग सका। जांच के लिए बनाया गया एप तीन दिन बाद तकनीकी खामी के चलते थम गया।
बता दें, अभी भी नोएडा की हवा येलो जोन में है। जहां मंगलवार को नोएडा का एक्यूआई 164 दर्ज किया है। इस बीच कई जगह धूल उड़ती दिखी और काला धुआं कचरे से उठता मिला।
अब समझें अब तक हुई कार्रवाई के आंकड़े
यूपीपीसीसी की ओर से अक्तूबर में हुई कार्रवाई : 30 परियोजनाओं पर 1 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना
परिवहन विभाग की ओर से इस साल अब तक हटाए गए पुराने वाहनों की संख्या : 728
तीनों जोन के लिए तीन टीमों का नेतृत्व एक एक नोडल अधिकारी को दिया गया है, उसी के तहत प्रदूषण फैलाने वालों कारकों पर लगातार कड़ी कार्रवाई जारी है। -
ऋतेश तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी, क्षेत्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, नोएडा।
हमारी पांच टीमें नियमित रूप से जिलेभर में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई कर रही हैं, यह क्रम जारी है, मियाद पूरी कर चुके पुराने वाहन जब्त किए जा रहे हैं। -
नंद कुमार, एआरटीओ प्रशासन, परिवहन विभाग, गौतमबुद्ध नगर।
नोएडा। सेक्टर 117 के पास सडक में धूल। फोटो अमर उजाला