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Noida News: टेलीग्राम से पुलिस को नहीं मिल रही जानकारी, अटक रही साइबर क्राइम की जांच

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टेलीग्राम से पुलिस को नहीं मिल रही जानकारी, अटक रही साइबर क्राइम की जांच
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- यूपी साइबर क्राइम पुलिस समेत अन्य एजेंसियों को नहीं मिल रहा जबाव

सुशांत समदर्शी
नोएडा। साइबर जालसाजों का नया ठिकाना बना टेलीग्राम पुलिस के लिए भी सिरदर्द बन गया है। टेलीग्राम की तरफ से पुलिस को कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई जा रही है। इससे टेलीग्राम पर होने वाले साइबर क्राइम की जांच अटक रही है। जबकि फेसबुक, ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पुलिस को जानकारी दी जाती है। ऐसे में टेलीग्राम पर साइबर क्राइम करने वालों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है।

टेलीग्राम साइबर जालसाजों का नया ठिकाना बन गया है। यहां पार्ट टाइम नौकरी दिलाने से लेकर क्रिप्टो निवेश के नाम पर फ्रॉड हो रहा है। नोएडा साइबर क्राइम थाने में पिछले दो साल में करीब सवा सौ से अधिक साइबर क्राइम की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें हर दूसरी वारदात टेलीग्राम पर हुई है। इन मामलों की जांच के लिए साइबर क्राइम पुलिस जब टेलीग्राम के पास किसी घटना संबंधी जानकारी के लिए पत्राचार करती है तो उसका जवाब नहीं मिलता। जबकि अन्य सोशल साइट से आधिकारिक जबाव आता है।
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यूपी साइबर क्राइम के एएसपी केके सरोज का कहना है कि नेटवर्किंग एप व्हाट्स एप के बाद टेलीग्राम लोगों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि इस पर साइबर क्राइम की लगातार वारदात हो रही हैं। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम से जानकारी नहीं मिलने के कारण साइबर क्राइम की जांच पर खासा असर पड़ रहा है।


सर्वर के बारे में नहीं है ठोस जानकारी

नेटवर्किंग एप टेलीग्राम की शुरुआत रूस के दो भाइयों ने की है। इसका सर्वर पहले रूस में था। रूस में कुुछ नियमों के कारण वहां से इसका सर्वर बदलना पड़ा। हालांकि इसके बाद इसका सर्वर कभी बर्लिन, सिंगापुर और लंदन में शिफ्ट किया गया। इस बीच टेलीग्राम नेटवर्किंग एप के रूप में व्हाट्स एप का विकल्प बनने लगा। लेकिन व्हाट्स एप की तरह टेलीग्राम के बारे में पुलिस को अधिकृत जानकारी नहीं है।


टेलीग्राम पर डाटा बेचने की शिकायतें

टेलीग्राम पर लोगों का प्राइवेट डेटा खुलेआम शेयर किया जा रहा है और वहां ग्रुप पर बोली लगाई जा रही है। साइबर जालसाज लोगों के डेटा खरीद रहे हैं और उनके खाते में सेंधमारी कर रहे हैं। पुलिस के लिए टेलीग्राम पर बिकने वाले डाटा को रोकना बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।



टेलीग्राम पर वीडियो ट्रेनिंग नया ट्रेंड

अब साइबर जालसाजों ने टेलीग्राम ग्रुप पर वीडियो ट्रेनिंग देने का नया ट्रेंड शुरू किया है। इसके तहत पहले किसी भी शख्स को टेलीग्राम पर जोड़ा जाता है। उसे क्रिप्टो निवेश सहित अन्य तरह से निवेश कराने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके बाद उसी टेलीग्राम ग्रुप पर उस विषय की वीडियो ट्रेनिंग दी जाती है। पीड़ित का विश्वास हासिल करने के बाद साइबर ठगी की जाती है।
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इस तरह की सबसे अधिक जालसाजी

- क्रिप्टो एक्सचेंज में निवेश कराने के नाम पर ठगी।

- घर बैठे लाखों की कमाई का झांसा देकर फ्रॉड।

- यू-ट्यूब वीडियो लाइक कराने का झांसा देकर ठगी।

- शेयर मार्केट में लुभावने ऑफर के नाम पर जालसाजी।

- इंस्टाग्राम ग्रुप पर दोस्ती के बाद साइबर फ्रॉड।

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- फेसबुक की तरफ से 72 घंटे से एक सप्ताह के भीतर पुलिस को जानकारी मिलती है।

- ट्विटर से दो दिन से 10 दिन तक पुलिस को जानकारी मिल जाती है।

- यू-ट्यूब से 24 घंटे से 48 घंटे तक पुलिस को जानकारी मिलती है और कोई भी गलत वीडियो को बैन कराया जा सकता है।

- व्हाट्स एप से भी 72 घंटे से 100 घंटे के बीच जानकारी पुलिस को मिल जाती है।



हाल के दिनों में टेलीग्राम साइबर फ्रॉड का केंद्र बन गया है। पुलिस को टेलीग्राम की तरफ से जानकारी नहीं दी जा रही है। इस कारण साइबर फ्रॉड की जांच पर असर पड़ रहा है। जिस जबकि ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्स एप आदि की तरफ से जानकारी मिलती है। - के के सरोज, एएसपी, यूपी साइबर क्राइम
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