जमीन अधिग्रहण की खुलेंगी पुरानी फाइलें, प्राधिकरण करेगा जांच
- फाइलों को खंगालकर लगाया जाएगा किसानों की पात्रता और जमीनों की उपलब्धता का पता
- सेक्टर-146 के ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट को 5 प्रतिशत आबादी प्लॉट के तौर पर किसानों को देने के लिए प्रस्ताव लेकर गया था प्राधिकरण
- कुछ शर्तों के साथ 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट आवंटन को मिली सैद्धांतिक स्वीकृति
सुशील पांडेय
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण की पुरानी फाइलें खंगालेगा। इसका मकसद जमीन की उपलब्धता के अलावा किसानों की पात्रता का पता लगाना होगा। फाइलों को खंगालने के बाद प्राप्त डाटा से इसकी जानकारी मिलेगी कि अभी कितने किसानों को 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट देने बाकी हैं। इसके अलावा प्राधिकरण यह भी जान पाएगा कि अधिगृहीत की गई जमीन उसके पास है या नहीं। इसी शर्त के साथ प्राधिकरण की ओर से रखी गई 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण ने 209वीं बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखते हुए सेक्टर-146 की ग्रुप हाउसिंग की जमीन के भू उपयोग में बदलाव करने की अनुमति मांगी थी। प्राधिकरण इसका उपयोग किसानों को 5 प्रतिशत के प्लॉट देने में करना चाहता है। साथ ही साथ इससे होने वाले नुकसान की भरपाई भविष्य में वाणिज्यिक स्कीम में जमीन के रेट में बदलाव करते हुए करना चाहता है। बोर्ड में प्रस्ताव पेश करने के बाद चेयरमैन मनोज कुमार सिंह की ओर से 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट मामले में प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों से इसकी वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई। मौके पर प्राधिकरण पूरी रिपोर्ट नहीं दे पाया था।
तीसरी बार बोर्ड में गया है प्रस्ताव
किसानों के 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट का प्रस्ताव तीसरी बार गया है। इससे पहले 200वीं बोर्ड में भी इसे रखा गया था। बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा करने के वादे के साथ इसका अनुमोदन नहीं हो पाया था। इसके बाद दो बार और इसे बोर्ड बैठक में रखा गया। लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया। लेकिन इस बार इस पर अंतिम तौर पर मुहर लग गई। अब प्राधिकरण को पूरी रिपोर्ट तैयार करनी होगी ताकि मामले की पूरी जानकारी लेते हुए चेयरमैन और पूरा बोर्ड इस मामले में संतुष्ट हो सके।
अब प्राधिकरण को यह करना होगा
सबसे पहले प्राधिकरण यह पता करेगा कि नोएडा की कितनी जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। इसके बाद यह पता किया जाएगा कि जमीनों की अधिग्रहण के बाद 5 प्रतिशत के कितने प्लॉट लगने चाहिए थे। इनमें से कितने प्लॉट का आवंटन हो चुका है। यानी कितने किसानों को जमीन दी जा चुकी है। वर्तमान समय में कितने किसान ऐसे हैं, जो कि पात्र हैं और उनको जमीन देनी बाकी है।
यह भी करना होगा पता
सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए यह भी कहा गया है कि अगर प्राधिकरण ने किसानों को जमीन के बदले मुआवजा और 5 और 10 प्रतिशत के प्लॉट दिए तो वह जमीन मौके पर मौजूद है भी या नहीं। यानी उदाहरण के लिए किसी किसान को पांच एकड़ जमीन के बदले मुआवजा और जमीन दी तो उसकी पांच एकड़ जमीन प्राधिकरण के कब्जे में है या नहीं। इसका भी मिलान करना होगा। इससे यह फायदा होगा कि प्राधिकरण को यह पता लग जाएगा कि उसकी कितनी जमीन उसके कब्जे में नहीं है। अगर खाली जमीन निकलती है तो इसका फायदा प्राधिकरण को होगा।
जमीन नहीं मिली तो सेक्टर-146 की भूमि का होगा आवंटन
प्राधिकरण की जांच के बाद भी अगर जमीन नहीं निकल पाती है और पात्र किसान मिलते हैं। यानी उनको जमीन देनी पड़ी तो प्राधिकरण को सेक्टर-146 की जमीन देने की हरी झंडी मिल चुकी है। प्राधिकरण इस जमीन का उपयोग 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट लगाने में कर सकेगा।
यह है 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट का मामला
नोएडा प्राधिकरण ने किसानों से जमीन अधिग्रहण करने के समय जमीन की कुल कीमत की 90 प्रतिशत धनराशि मुआवजे के तौर पर दे दी। इसके बाद नियम के मुताबिक बची हुई राशि के बदले 5 और 10 प्रतिशत विकसित आबादी देने का प्लॉट देने का वादा किया, जहां किसान अपना आशियाना बना सके। इसी प्लॉट को लेकर प्राधिकरण के साथ किसानों का पुराना विवाद है। कई किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण ने अब तक उसको 5 प्रतिशत के विकसित प्लॉट नहीं दिए। वहीं कई किसानों की यह भी मांग है कि उनको 5 नहीं बल्कि 10 प्रतिशत विकसित आबादी के प्लॉट मिलने चाहिए।
पांच प्रतिशत आबादी के जमीन का आंकड़ा
250 किसानों को दी जानी है जमीन
15000 किसानों को मिल चुकी हैं प्लॉट
650 किसानों को मिला पैसा
1000 कोर्ट केस के बाद इतने किसानों को मिला फायदा
कुछ शर्तों के साथ 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट आवंटन को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। लेकिन इससे पहले यह पता लगाया जाएगा कि कितनी जमीनें अधिग्रहण हुई हैं और पात्र किसानों में से कितनों को प्लॉट मिले हैं। इसके लिए भूलेख विभाग को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। - रितु माहेश्वरी, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण