यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती एसी स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्री जिंदा जल गए और 20 यात्री घायल हो गए। पोस्ट के द्वारा बस में आरएसएस और भाजपा के लोगों द्वारा आग लगाने और इसमें तीस से अधिक मुस्लिम यात्रियों की मौत का दावा किया गया था। मामले में भड़काऊ और भ्रामक पोस्ट प्रसारित करने पर पुलिस ने कार्रवाई की है। मीडिया सेल के उपनिरीक्षक की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के मामले में भड़काऊ और भ्रामक पोस्ट प्रसारित करने पर पुलिस ने कार्रवाई की है। आरोप है कि रुमाखातून नामक एक्स हैंडल से घटना का वीडियो पोस्ट कर उसमें आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी की गई। बस में आरएसएस और भाजपा के लोगों द्वारा आग लगाने और इसमें तीस से अधिक मुस्लिम यात्रियों की मौत का दावा किया गया था।
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पुलिस के अनुसार पोस्ट से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने तथा लोगों में भय और आक्रोश फैलने की आशंका थी। मामले में मीडिया सेल के उपनिरीक्षक की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
बता दें कि यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती एसी स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्री जिंदा जल गए। 20 यात्री घायल हो गए। मृतकों में तीन पुरुष व तीन महिलाएं हैं। तीन की पहचान नहीं हुई है। हादसे में चालक की भारी लापरवाही सामने आई है। यात्रियों ने जलने की बदबू आने और आग लगी होने की शिकायत की थी, पर चालक हंसते हुए बीड़ी पीते रहे। धमकाते हुए कहा, मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे।
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बुधवार रात 11:30 बजे दिल्ली से महोबा जा रही बस जेवर एयरपोर्ट से 500 मीटर आगे निकलते ही हादसे की शिकार हो गई। उसमें 30-35 यात्री सवार थे। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर चालक पवन व विनोद, परिचालक योगेश को गिरफ्तार किया है। तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में एसी में स्पार्क से आग लगने की आशंका है।
बस के 19 चालान, पंजीकरण बिहार में, संचालन मप्र से और पीयूसी हरियाणा से
हादसे की शिकार बस बीआर32पीए8647 का 19 बार चालान के साथ 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। बस का संचालन मप्र की राज कल्पना ट्रैवल एजेंसी करती है, जबकि पंजीकरण बिहार के मधुबनी में है। फिटनेस राजस्थान से, प्रदूषण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी हुआ है। इसके वास्तविक संचालक का अभी तक पता नहीं चला है। अलग-अलग राज्यों में दस्तावेज किस आधार पर जारी किए गए, इसकी जांच की जा रही है।