पुलिसकर्मियों के खिलाफ की कार्रवाई की मांग
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ग्रेटर नोएडा के बिसरख कोतवाली पुलिस पर अधिवक्ता और उनके परिवार से अभद्रता और पिटाई के आरोप लगे हैं। अधिवक्ता की पिटाई से नाराज अधिवक्ताओं ने कोतवाली पहुंचकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि पिटाई के आरोप निराधार है। आरोप है कि अधिवक्ता के भाई मारपीट के एक मामले में नामजद है। पुलिस जब दबिश के लिए तो अधिवक्ता ने अपने भाई को फरार करा दिया साथ ही पुलिस के साथ अभद्रता की।
अधिवक्ता अमित राणा ने बताया कि सूरजपुर स्थित न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता फरीद अहमद अपने परिवार के साथ ककराला गांव में रहते हैं। शनिवार रात करीब साढ़े 11 बजे पुलिस चार पुलिसकर्मी अधिवक्ता के घर पहुंचे। यहां अधिवक्ता और उनके परिवार से अभद्रता की गई। अधिवक्ता की पिटाई के बाद कोतवाली में लाकर बंद कर दिया गया। सूचना मिलने पर रविवार सुबह जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी व सचिव शोभाराम चंदीला अन्य साथी अधिवक्ताओं के साथ बिसरख कोतवाली पहुंचे और अवैध हिरासत में रखे गए अधिवक्ता को छुड़ाया।
पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा किया। इस मौके पर मौजूद सहायक पुलिस आयुक्त पवन कुमार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीड़ित अधिवक्ता का मेडिकल जांच कराने में देरी की गई। अमित राणा ने बताया कि कार्रवाई न होने पर कल से अधिवक्ताओं द्वारा धरना प्रदर्शन तथा पुलिस आयुक्त का घेराव किया जाएगा। अधिवक्ता की भाभी से अभद्रता कर उनके कपड़े फाड़ दिए। इससे उनके हाथ में चोट आई है। साथ ही मोबाइल भी छीनने का प्रयास किया। वहीं अधिवक्ता की पीठ और पीछे के नीचे निजी अंगों को डंडे से पीटा। इससे अधिवक्ता के चोट के निशान आए हैं।
वहीं बार अध्यक्ष मनोज भाटी ने बताया कि सूचना के बाद मौके पर पहुंचे थे। पुलिस से पीड़ित अधिवक्ता के मेडिकल जांच के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। अगर प्राथमिकी दर्ज आरोपियों पुलिसकर्मियों को निलंबित नहीं किया जाता है तो बार में मुद्दा उठाकर सर्वसम्मति से निर्णय लेकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। वहीं एसीपी पवन कुमार का कहना है कि मामले की विभागीय जांच की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।