पीएम ने किया संवाद, किसानों ने ताली-थाली बजा किया विरोध
नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संवाद कर किसानों को भरोसे में लेने की कोशिश की, लेकिन सरकार-किसानों के बीच गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है। प्रधानमंत्री के भाषण के बाद दलित प्रेरणा स्थल में किसानों ने ताली-थाली, शंख व घड़ियाल बजाकर जमकर विरोध जताया। भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के नेताओं ने किसान आंदोलन का समर्थन किया और कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग फिर से उठाई।
प्रधानमंत्री के भाषण को सुनने के बाद दोपहर करीब 2 बजे किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में हंगामा शुरू कर दिया। प्रेरणा स्थल की सीढ़ियों पर बैठकर किसानों ने चम्मचों से थालियों को बजाना शुरू कर दिया। जिन किसानों के हाथों में थालियां नहीं थीं, उन्होंने तालियां बजाईं। कुछ किसानों ने घंटे बजाकर तो कुछ ने शंख बजाकर सरकार को संदेश दिया कि कृषि कानूनों का विरोध जारी रहेगा। वहीं, क्रिसमस होने से प्रेरणा स्थल में घूमने आने वालों की खासी भीड़भाड़ रही। लोगों ने घूमने-फिरने के साथ किसान आंदोलन को भी नजदीक से देखा।
भाजपा कार्यकर्ता किसानों के समर्थन में
कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा के कार्यकर्ता भी त्यागपत्र देकर किसानों के समर्थन में आ रहे हैं। ऐसे ही कई कार्यकर्ता लोकशक्ति संगठन को समर्थन देने के लिए पहुंचे। राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने बताया कि लगातार दूसरे दिन 50 से ज्यादा भाजपा के किसान कार्यकर्ताओं ने धरनास्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया है।
चिल्ला बॉर्डर पर किसानों ने किया अनशन
चिल्ला बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (भानु) के बैनर तले 25वें दिन भी किसानों का धरना जारी रहा। धरना स्थल पर पांचवें दिन क्रमिक भूख हड़ताल जारी रही। मनीषा सोम, रामेश्वर चौधरी, सागीर पठान, प्रदीप शर्मा, योगेश सिसौदिया, सौरभ यादव, विपिन यादव, योगेंद्र, राजीव नागर, अशोक चौहान, नत्थू सिंह, पंडित विवेक शास्त्री भूख हड़ताल पर बैठे। धरना स्थल पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने किसानों को संबोधित किया। शाम को भाकियू पंजाब की टीम ने मौके पर पहुंचकर किसानों के लिए मेडिकल कैंप लगाया और सर्दी के कपड़े वितरित किए।
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लिंक रोड पर मंद रही वाहनों की रफ्तार
किसान आंदोलन की वजह से जगह-जगह रास्ते बंद हैं। इस कारण शुक्रवार को भी दिल्ली-नोएडा लिंक रोड पर वाहनों की रफ्तार मंद रही। हालांकि, क्रिसमस का अवकाश होने से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम था, जिससे जाम से थोड़ी राहत जरूर रही, लेकिन रूट डायवर्जन की वजह से लोगों को लंबी दूरी नापनी पड़ी।
हमें फसलों का मूल्य चाहिए
पीएम ने जिन किसानों से बात की उनमें से किसी ने कोई समस्या नहीं बताई। इसका मतलब देश का किसान खुश है। अगर ऐसा है तो कृषि कानून बनाने की जरूरत ही क्या है। हमें फसलों का मूल्य चाहिए, दो हजार रुपये की भीख नहीं। आखिर एमएसपी की गारंटी देने से सरकार क्यों बच रही है। - मास्टर श्यौराज सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष-भाकियू लोकशक्ति
किसानों के मन की सुनें पीएम
प्रधानमंत्री दिल्ली की सीमाओं पर महीने भर से बैठे किसानों से अगर मन की बात कर लेते तो अच्छा रहता। प्रधानमंत्री को अपने मन की बात बताने के लिए किसान परेशान हैं। हमारी शुरू से ही मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए, लेकिन सरकार सिर्फ विकल्प ही सुझा रही है। - राजीव नागर, जिलाध्यक्ष-भाकियू भानु
किसान अब जागरूक हो गया
किसान कर्ज लेकर चुका नहीं पा रहा है। देश के दस प्रतिशत किसानों के खातों में भी सम्मान निधि की रकम नहीं गई है। केवल झूठ बोलकर किसानों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन किसान अब जागरूक हो गया है। सरकार से अपना हक लेकर ही रहेगा। - शिबू मुखिया, किसान नेता