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मन की बात में मिशन शक्तिसैट की गूंज: जीबीयू के मिशन की पीएम ने की तारीफ, 108 देशों की छात्राएं सीख रहीं तकनीक

Sun, 30 Aug 2026 01:42 PM IST
Rahul Kumar Tiwari माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण में ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में चल रहे मिशन शक्तिसैट का उल्लेख किया। उन्होंने 108 देशों की करीब 12 हजार छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और नवाचार से जोड़ने वाली पहल की सराहना की और इसे महिला वैज्ञानिक नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
 
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मन की बात में मिशन शक्तिसैट की गूंज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण में जीबीयू में चल रहे मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए छात्राओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की बेटियों की शक्ति की उड़ान अब धरती तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष तक पहुंच रही है। मिशन शक्तिसैट के माध्यम से 108 देशों की करीब 12 हजार छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और नवाचार सीखने का अवसर मिल रहा है।  उन्होंने कहा मुझे विश्वास है कि इनमें से अनेक छात्राएं आने वाले समय में साइंस,टेक्नोलॉजी और इनोवेशन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएगी। पूरी तरह छात्रों की भागीदारी तैयार एक सैटेलाइट को मून की ओर वीडियो में भेजने की तैयारी है। 
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प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में मिशन शक्तिसैट के दूसरे चरण के शुभारंभ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर भारत और दुनिया के अलग-अलग देशों से करीब 100 छात्राएं एक साथ जुटीं। भारत के दूरदराज क्षेत्रों की छात्राएं भी इस पहल में भाग ले रही हैं। 

पीएम मोदी ने कहा कि मिशन का लक्ष्य छात्राओं की भागीदारी से तैयार सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की तैयारी करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि मिशन से जुड़ने वाली अनेक छात्राएं आने वाले समय में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएंगी। 

स्पेस किड्स इंडिया की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. श्रीमथी केसन के नेतृत्व में चल रहे इस मिशन में छात्राओं को स्पेस साइंस, सैटेलाइट तकनीक, पेलोड और अंतरिक्ष मिशन से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केसन के अनुसार, मिशन का उद्देश्य छात्राओं को केवल अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य की वैज्ञानिक और तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना है। 
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वहीं जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि मिशन शक्तिसैट विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। दुनिया के विभिन्न देशों की छात्राओं का एक मंच पर आकर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में काम करना वैश्विक सहयोग की मिसाल है। इससे छात्राओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित होगी। कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने के लिए हरसंभव सहयोग कर रहा है। मिशन के माध्यम से छात्राओं को कक्षा में पढ़ाई के साथ वास्तविक सैटेलाइट निर्माण की प्रक्रिया समझने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जीबीयू के लिए ये बड़ा मंच था। देश की छात्राओं के लिए जीबीयू हमेशा खड़ा रहेगा। 
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