दरअसल, सेक्टर-55 के ए-ब्लॉक में रहने वाले उद्यमी महेंद्र शर्मा खुशमिजाज इंसान थे। वह करीब सात-आठ सालों से शौक के तौर पर बैडमिंटन खेल रहे थे। रोज की तरह वह सुबह सात से आठ बजे के स्लॉट में बैडमिंटन खेलने स्टेडियम में पहुंचे थे। यहां खेलते समय ही उन्हें सीने में दर्द का अनुभव हुआ। जिससे वह कोर्ट के बाहर जाकर बैठ गए। वहां खेल रहे अन्य लोगों ने उन्हें पानी पिलाया ताकि उन्हें थोड़ा आराम मिल सके। उनकी बिगड़ती तबीयत को देखकर बगल वाले कोर्ट में बैडमिंटन खेल रहे डॉक्टर संदीप कवल ने तुरंत प्राथमिक उपचार देते हुए मेट्रो अस्पताल से एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया। बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने करीब चार घंटे जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार इस दुनिया को छोड़ दिया।
इसकी सूचना मिलते ही उनके साथ बैडमिंटन खेलने वाले लोगों के अलावा अन्य खेल प्रेमी भी शोक में डूब गए। वह हर किसी से हंस कर मिलते थे। उनके साथ खेलने वाले आशीष मलहोत्रा ने बताया कि वह रोज की तरह खेलने के लिए आए थे। क्या पता था कि आज उनके साथ आखिरी बार खेलेंगे। महेंद्र शर्मा एक सफल उद्यमी थे। सेक्टर-11 में उनकी प्लास्टिक मोल्डिंग की फैक्ट्री है। परिवार में 22 साल की एक बेटी और 18 साल का बेटा है।