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Noida News: बढ़ते कमर-गर्दन के दर्द के बीच फिजियोथेरेपी मरीजों के लिए बनी उम्मीद

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- 50 रुपये में जिम्स में सुविधा, सीएचसी डाढ़ा में एक रुपये की पर्ची पर इलाज
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माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण कमर, गर्दन, कंधे, घुटने और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे मरीजों के लिए फिजियोथेरेपी उपचार का अहम विकल्प बनकर सामने आया है। इसका असर अब सरकारी अस्पतालों में भी दिखाई दे रहा है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) और डाढ़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में रोजाना करीब 170 से 180 मरीज फिजियोथेरेपी का लाभ लेने पहुंच रहे हैं।

जिम्स के फिजियोथेरेपी विभाग में प्रतिदिन 150 से 160 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां महीने में चार से पांच हजार से अधिक मरीज फिजियोथेरेपी सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। खास बात यह है कि मरीजों को महज 50 रुपये में यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकारी अस्पताल में आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद से मरीजों की समस्या के अनुसार उपचार किया जाता है। वहीं, डाढ़ा गांव स्थित सीएचसी में भी फिजियोथेरेपी सेवा शुरू होने के बाद मरीजों को काफी राहत मिली है। यहां रोजाना करीब 15 से 20 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। सीएचसी में एक रुपये की पर्ची पर मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार फिजियोथेरेपी कराई जाती है।
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आधुनिक मशीनों से हो रहा उपचार

अस्पतालों में मरीजों को उनकी बीमारी और शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग तकनीकों से उपचार दिया जा रहा है। इसके लिए मैग्नेट थेरेपी, बैलेंस थेरेपी, अल्ट्रासोनिक थेरेपी और लेजर थेरेपी जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिजियोथेरेपी के साथ मरीजों को आवश्यक व्यायाम भी बताए जाते हैं, ताकि उपचार का असर लंबे समय तक बना रहे। जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि संस्थान में फिजियोथेरेपी का प्रतिदिन 150 से 160 से अधिक मरीज इसका लाभ ले रहे हैं।



घर पर व्यायाम और सावधानी भी जरूरी


सीएचसी डाढ़ा की फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रतिमा आचार्य ने बताया कि मरीज की समस्या के अनुसार फिजियोथेरेपी कराई जाती है। उपचार के दौरान उन्हें आवश्यक व्यायाम और सावधानियों के बारे में भी बताया जाता है। मरीजों को यह जानकारी दी जाती है कि घर पर कौन से व्यायाम किए जा सकते हैं और किन गतिविधियों से फिलहाल बचना चाहिए। नियमित रूप से व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से कई शारीरिक परेशानियों में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।



सिर्फ दर्द की दवा पर निर्भर न रहें

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. आचार्य का कहना है कि शरीर में होने वाले दर्द को केवल दवा के सहारे दबाना स्थायी समाधान नहीं है। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि कई लोग दर्द होने पर तुरंत दवा ले लेते हैं और कुछ समय के लिए राहत महसूस करते हैं, लेकिन समस्या का मूल कारण बना रहता है। ऐसे में बार-बार दवा लेने की स्थिति बन सकती है।
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बढ़ती उम्र में बढ़ रही फिजियोथेरेपी की जरूरत, युवाओं में भी बढ़ी शारीरिक समस्याएं

ग्रेटर नोएडा (संवाद)। बदलती जीवनशैली का असर युवाओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। कैलाश हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के फिजियोथेरेपी विभाग की एचओडी डॉ. मीनू यादव ने बताया कि फिजियोथेरेपी की आवश्यकता 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिलती है। उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों, मांसपेशियों और शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में फिजियोथेरेपी मरीजों की शारीरिक क्षमता और दैनिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में सहायक होती है।
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