फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: बिना दवा और सर्जरी के फिजिकल थेरेपी बनी दर्द से राहत की कुंजी

Mon, 07 Sep 2026 08:49 PM IST
नोएडा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
विज्ञापन

आईटी और कॉर्पोरेट हब माने जाने वाले नोएडा में स्क्रीन पर घंटों झुककर काम करने की आदत सर्वाइकल और लोअर बैक पेन का बड़ा कारण बनती जा रही है। 20 वर्ष से अधिक उम्र के युवा इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। राहत की बात यह है कि दवाओं के दुष्प्रभावों और सर्जरी के डर के बिना फिजियोथेरेपी राहत की मुख्य कुंजी साबित हो रही है।

विज्ञापन


नोएडा के प्रमुख निजी और सरकारी अस्पतालों के फिजियोथेरेपी विभागों में हाल के वर्षों में मरीजों की संख्या में उछाल आया है। पहले जहां 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग जोड़ों और कमर दर्द की शिकायत लेकर आते थे,वहीं अब ओपीडी में पहुंचने वाले 60% से अधिक मरीज 20 से 40 वर्ष के युवा पेशेवर हैं। पिछले तीन वर्षों में खराब पोस्चर और लंबे समय तक डेस्क वर्क के कारण सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस, टेक्स्ट नेक सिंड्रोम और स्लिप डिस्क के मामलों में 40 से 45% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जिला अस्पताल में रोजाना आते हैं 50-60 मरीज
जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग के एचओडी डॉ. अभिनव कुमार ने बताया कि अस्पताल में 2020 से फिजियोथेरेपी विभाग शुरू हुआ था। यहां पर फिजियोथेरेपी के लिए रोजाना 50-60 लोग आते हैं। इसमें किशोरों से लेकर बुजुर्ग भी शामिल होते हैं लेकिन युवाओं की संख्या कई बार अधिक होती है। किशोरों में 15 वर्ष से अधिक उम्र के, युवाओं में 20, 30, 40 वर्ष के युवा अधिक होते हैं। वहीं बुजुर्गों में 60-70 वर्षीय अधिक शामिल होते हैं। युवाओं में गलत लाइफ स्टाइल परेशान कर रहा है लेकिन बुजुर्गों में उम्र का फैक्टर उन्हें दर्द से राहत नहीं लेने देता है। हालांकि दवाओं के साथ ही फिजियोथेरेपी से दर्द में विशेष राहत मिल जाती है।
विज्ञापन


फिजिकल थेरेपी चोट या सर्जरी के बाद रिकवरी तक सीमित नहीं
सेंटर फॉर नी एंड हिप केयर नोएडा के फिजियोथेरेपी विभाग के एचओडी डॉ. इंद्रमणि उपाध्याय ने बताया कि लगातार एक ही पोजीशन में रहने से मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और रीढ़ पर अतिरिक्त भार आता है। कम शारीरिक गतिविधि, गलत पोस्चर और व्यायाम की कमी भी इसकी बड़ी वजह हैं। सेक्टर 110 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुनील त्यागी ने कहा कि आज के समय में फिजिकल थेरेपी केवल चोट या सर्जरी के बाद की रिकवरी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दर्द को नियंत्रित करने और शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर झुककर काम करने की आदत के कारण गर्दन, कंधे और कमर से जुड़ी परेशानियां कम उम्र में भी देखने को मिल रही हैं। कई लोग दर्द को नजरअंदाज करते रहते हैं और जब रोजमर्रा के काम को प्रभावित होने लगते हैं, तभी उपचार के लिए पहुंचते हैं।

स्क्रीन टाइम का असर
डॉक्टरों के अनुसार, काम और निजी उपयोग मिलाकर युवा रोजाना औसतन 9 से 11 घंटे स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं, जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डियों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
विज्ञापन


इन बातों का रखें ध्यान
लगातार कई घंटों तक एक ही मुद्रा में न बैठे रहें
-काम के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लें
-स्क्रीन से हल्की दूरी बनाकर रखें
-सही बैठने की स्थिति बनाएं
-नियमित शारीरिक गतिविधियां करें
-दर्द को दबाने के बजाय उसके कारण को समझें और डॉक्टर से सलाह लें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें