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हवा खराब हुई तो अस्पतालों में बढ़े सांस के रोगी

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हवा खराब हुई तो अस्पतालों में बढ़े सांस के रोगी
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नोएडा/ग्रेटर नोएडा। प्रदूषण का प्रभाव तो पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लेकिन, जहरीली हवा जब फेंफड़ों तक जाती है तो सबसे ज्यादा सांस संबंधी रोग बढ़ते हैं। दिवाली बाद खराब हुई हवा ने अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से जूझ रहे मरीजों की परेशानी को बढ़ाने का काम किया है। वहीं, नोएडा में 40 तो ग्रेटर नोएडा में 20 फीसदी सांस संबंधी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 400-500 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 160-200 मरीज सिर्फ सांस संबंधी बीमारियों के हैं। प्रदूषण के चलते इन्हें अस्थमा, निमोनिया, गले में खराश, सांस फूलना, चक्कर आना, सर्दी, खांसी, जुकाम व सीओपीडी की शिकायत है।
फिजिशियन डॉ. संतराम ने बताया कि प्रतिदिन 3-4 मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होने के कारण भर्ती करना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। वहीं, ग्रेनो के जिम्स की ओपीडी लगभग 1500 मरीज प्रतिदिन आते हैं। इनमें 400 से 500 मरीज मेडिसन डिपार्टमेंट के होते हैं। इन्हें खांसी, जुकाम, श्वांस और बुखार आदि की शिकायत है। जिम्स स्थित एचओडी मेडिसन के डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि पर्यावरण में गैस का आवरण छाया हुआ है। यह स्मॉग है जो सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा रहा है। दूषित हवा से फेफड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और सांस के रोगियों को खास एहतियात बरतने की जरूरत है।
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निजी अस्पतालों में भी बढ़े मरीज
फोर्टिस, कैलाश, जेपी, प्रयाग, प्रकाश, यथार्थ, क्लाउडनाइन, मेट्रो अस्पताल, एसआरएस, आइकेयर, मैक्स व फेलिक्स समेत अन्य निजी अस्पतालों का भी यही हाल है। यहां भी रोगियों में करीब 40-50 फीसदी का इजाफा हुआ है। मेट्रो अस्पताल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. दीपक कुमार प्रजापति ने बताया कि दिवाली के बाद से ओपीडी में 170 के करीब मरीज आए हैं। इनमें करीब 20-25 मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर होने पर उन्हें भर्ती करना पड़ा है। जबकि दिवाली से पहले ओपीडी में 20-25 से मरीज प्रतिदिन आते थे।
प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के लक्षण
- जुकाम होना
- आंखों में जलन
- साइनस व अस्थमा
- खांसी, गले में संक्रमण
- फेफड़ों संबंधी बीमारियां
- सांस लेने में तकलीफ होना
प्रदूषण से बचाव के उपाय
- आंखों पर चश्मा लगाएं
- सुबह-शाम टहलने से बचें
- एन-95 मास्क लगाकर ही निकलें
- घर के अंदर भी सफाई रखें
- घर के बाहर सड़क को गीला रखें, ताकि धूल के दूषित कण हवा में न उडे़
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