ग्रेटर नोेएडा (संवाद)। परिवर्तिनी एकादशी बुधवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा के दौरान करवट बदलते हैं। इसके अलावा इस एकादशी को पद्मा और जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित परिवर्तिनी एकादशी का विशेष महत्व होता है।
पुराणों के अनुसार इस एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में करवट बदलने के समय प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं। सेक्टर डेल्टा-एक स्थित पीपल महादेव मंदिर के पुजारी आरडी तिवारी ने बताया कि इस दिन सुबह स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उन्हें पंचामृत (दही, दूध, घी, शक्कर, शहद) से स्नान करवाएं। इसके पश्चात गंगा जल से स्नान करवा कर भगवान विष्णु को कुमकुम-अक्षत लगाएं। वामन भगवान की कथा का श्रवण या वाचन करें और आरती उतारे व प्रसाद सभी में वितरित करें। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 3 सितंबर को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी और समापन 4 सितंबर को सुबह 4:22 बजे होगा। इस व्रत को करने से व्यक्ति के सुख, सौभाग्य में वृद्धि होती है।