आर्यसमाज बिचली जौलीग्रांट में आयोजित 60वीं रामलीला के दूसरे दिन फुलवारी लीला, रावण बाणासुर संवाद, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण परशुराम संवाद का मंचन किया गया। राजा जनक की ओर से आयोजित स्वयंवर में कई बलशाली राजा शामिल होते हैं लेकिन कोई भी शिव धनुष को हिला तक नहीं पाता है। विश्वामित्र का इशारा मिलते ही श्रीराम धनुष को दो टुकड़ों में तोड़ देते हैं। सीता श्रीराम के गले में वरमाला डालती है। शिव धनुष टूटते ही परशुराम आगबबूला होकर हाथों में फरसा लिए वहां आते हैं। वो कहते हैं कि जिसने भी धनुष तोड़ा है वो सामने आए नहीं तो सभी राजा उनके हाथों मारे जाएंगे। जिसके बाद परशुराम लक्ष्मण के बीच संवाद होता है। श्रीराम परशुराम को शांत करते हैं।