पिता से चैट में बार-बार छलका दर्द, आत्महत्या से करीब एक महीने पहले हुआ था तलाक का समझौता
बच्चे के इलाज का कर्ज, वैवाहिक विवाद और आर्थिक दबाव से परेशान होने की बात सामने आई
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। इंजीनियर संभव जैन की आत्महत्या के मामले में पुलिस की जांच जारी है। पुलिस ने उनके मोबाइल की चैट खंगालने के साथ परिजनों से भी पूछताछ की है। जांच में संभव के निजी जीवन में कई परेशानियां होने की बात सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। परिजनों के मुताबिक, उनके पिता फोन और चैट के जरिये लगातार उन्हें समझाते और संभालते थे।
परिजनों ने पुलिस को बताया कि पिछले कुछ समय में संभव का वजन तेजी से बढ़ा था और वह 125 किलो से अधिक हो गया था। वर्ष 2024 में उनकी शादी हुई थी। पिछले वर्ष उनकी पत्नी ने समय से पहले बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण उसे करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रखना पड़ा। परिवार के मुताबिक, इलाज में कई लाख रुपये खर्च हुए, जिसके बाद परिवार पर करीब 30 से 35 लाख रुपये का कर्ज हो गया।
बच्चे की चिंता के साथ बिगड़ता गया वैवाहिक रिश्ता
बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद संभव और उनकी पत्नी के बीच रिश्ते बिगड़ने लगे। परिजनों के मुताबिक, उनकी पत्नी बच्चे को लेकर मायके चली गई थीं। बाद में मामला अदालत तक पहुंचा। सेक्टर-126 थाना प्रभारी सुमनेश कुमार के मुताबिक, दोनों के बीच करीब 15 लाख रुपये में तलाक का समझौता हुआ था। इसमें से करीब साढ़े सात लाख रुपये एक महीने पहले दिए गए थे। ऐसे में एक तरफ बच्चे के इलाज से जुड़ा आर्थिक बोझ था तो दूसरी ओर वैवाहिक विवाद के बाद समझौते की रकम और अन्य जिम्मेदारियों का दबाव भी था।
‘पापा, मैं नहीं जिऊंगा... बेटे का ध्यान रखना’
पुलिस और परिजनों के मुताबिक, संभव की चैट में सबसे अधिक चिंता अपने छोटे बेटे को लेकर दिखाई देती है। वह अपने पिता से बेटे का ध्यान रखने की बात भी कहते थे। परिजनों के अनुसार, उस समय उन्होंने इन बातों को तनाव के बीच कही गई भावनात्मक बातें समझा। पुलिस की जांच में सामने आए संदेशों में संभव के परेशान होने के संकेत मिलने की बात कही जा रही है। बच्चे के इलाज का खर्च, बढ़ता कर्ज, वैवाहिक विवाद और तलाक के बाद की आर्थिक जिम्मेदारियों को पुलिस जांच के अहम पहलुओं में शामिल कर रही है। परिजनों का कहना है कि इन परिस्थितियों के बीच संभव लगातार तनाव में थे। पुलिस अब उनकी चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितियों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि आत्महत्या से पहले उनकी मानसिक और व्यक्तिगत स्थिति कैसी थी।
हादसे के बाद रातभर नहीं सो पाए कर्मचारी
नोएडा। सुपरनोवा सोसाइटी में शनिवार को हुआ हादसा वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी बेहद परेशान करने वाला रहा। मौके पर पहुंचे तीन कर्मचारियों दीपक, जसबीर और लक्ष्मण ने शव के अवशेषों को समेटने का काम किया। इस घटना का उन पर गहरा असर पड़ा। कर्मचारियों के मुताबिक, हादसे के बाद शनिवार रात वे ठीक से खाना तक नहीं खा सके। दीपक ने रविवार को ड्यूटी से छुट्टी ले ली। उन्होंने बताया कि घटना के बाद वह मानसिक रूप से काफी परेशान थे और काम पर जाने की स्थिति में नहीं थे। जसबीर और लक्ष्मण रविवार को ड्यूटी पर पहुंचे। दोनों ने रोज की तरह अपनी जिम्मेदारी संभाली, लेकिन सहकर्मियों के मुताबिक उनके चेहरे पर हादसे का असर साफ दिखाई दे रहा था। सोसाइटी में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच रविवार को भी घटना की चर्चा होती रही।
जहां वीकेंड पर कदम रखने की जगह नहीं होती थी, वहां खाली दिखी पार्किंग
नोएडा। शनिवार को सुपरनोवा में हुए हादसे के बाद रविवार को परिसर का माहौल सामान्य दिनों से अलग दिखाई दिया। वीकेंड पर आमतौर पर सबसे अधिक आवाजाही वाले सुपरनोवा परिसर में रविवार को अपेक्षाकृत कम लोग और वाहन नजर आए। पार्किंग में तैनात एक कर्मचारी के मुताबिक, शनिवार और रविवार को यहां आमतौर पर काफी भीड़ रहती है। सुबह से ही वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है। हादसे के बाद इस सप्ताहांत परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में कम वाहन दिखाई दिए। घटना का असर सोसाइटी के सामान्य माहौल पर भी दिखाई दिया। जहां वीकेंड पर लोगों की आवाजाही और गतिविधियां बढ़ जाती थीं, वहां रविवार को कई हिस्सों में अपेक्षाकृत सन्नाटा नजर आया।