संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। मंडियों में धान की खरीद ने तेजी पकड़ ली है। वहीं किसानों को धान की खरीद के बाद पक्की की जगह कच्ची पर्ची दी जा रही है जिससे किसानों को गड़बड़ी का अंदेशा है। किसानों का कहना है कि इससे आढ़ती खुद टैक्स से बच रहे हैं। उनको भी सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिलन पाता है।
बारिश में भीगा धान शनिवार को सूखने के बाद खरीद में तेजी आई है। जिले की मंडियों में अब तक 99791 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। साथ ही मंडियों में 86064 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। इसके अलावा मंडियोंं में 4171 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है। जो मंडी के कुल धान का 37.93 प्रतिशत है।
किसान जगदीश, फतेहसिंह और नफेसिंह निवासी उग्राखेड़ी ने बताया कि वह 10 दिन पहले मंडी में धान लेकर पहुंचे हैं। पहले दिन अधिकारियों की ओर से धान की जांच कर नमी बताकर धान को फैलाकर सुखाने की हिदायत दी गई। जिसके बाद वह मंडी में धान फैलाकर सुखाने लगे। उन्हें दिनरात धान के पास रहकर रखवाली करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि अधिकारियोंं द्वारा कई बार धान की जांच कर नमी बताकर खरीद नहीं की जा रही है। जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। उनको धान की कच्ची पर्ची दी जा रही है। जबकि जे-फार्म देना चाहिए। इससे किसान जरूरत अनुसार प्रयोग कर सकते हैं।
आढ़ती हर समय किसान के साथ रहता है। धान की खरीद पर किसान को जे-फार्म दिया जाता है। पीआर की खरीद में सरकारी रेट पर खरीद की जाती है। कुछ आढ़ती 1509 किस्म की खरीद पर कच्ची पर्ची दे रहे हैं। वे बैठक में भी आढ़तियों से इस बारे में बात करेंगे।
दिनेश भौक्कर, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन पानीपत
मंडी में किसानों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है। जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो। साथ ही मंडी में बारिश से कुछ प्रतिशत धान को ही नुकसान हुआ है। जिसके बाद मंडी में पर्याप्त मात्रा में तिरपाल होने से धान को भीगने से बचाने का कार्य किया गया था। मंडी में अधिकतर धान को शेड के नीचे रखा गया है। मंडी में अब 4171 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है। जल्द ही उठान कार्य में तेजी लाई जाएगी। जे-फार्म की जगह कच्ची पर्ची देने की कोई शिकायत नहीं मिली हैं। इसका पता लगाया जाएगा।
- आशा देवी, सचिव, मार्केट कमेटी पानीपत