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तीस दिन चला ‘ऑपरेशन मुस्कान’, 78 परिवारों के चेहरे पर आई खुशी

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सेक्टर- 108 स्थित पुलिस कमीश्नर कार्यालय में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करते
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नोएडा। तीस दिन तक चले ऑपरेशन अभियान के तहत पुलिस ने 78 लापता बच्चों को उनके परिजनों से मिला दिया। वर्षों बाद बच्चों से मिलकर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों ने पुलिस को धन्यवाद दिया है। पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि इनमें से ज्यादातर बच्चे नाराज होकर घर से निकले थे। इन 78 बच्चों में से 47 ऐसे थे, जिनकी गुमशुदगी वर्ष 2020-21 के दौरान दर्ज की गई थी।
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एक माह तक चले ऑपरेशन मुस्कान का समापन हो गया। सेक्टर-108 स्थित पुलिस कार्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त ने कहा कि अभी भी 20 से 25 बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटीयू) पुलिस टीम की विशेष भूमिका रही है, साथ ही एसीपी और संबंधित थाना पुलिस ने भी सहयोग दिया है।
इसके लिए एएचटीयू टीम के प्रभारी निरीक्षक देंवेंद्र सिंह और सब इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार के अलावा अन्य को सम्मानित किया है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में बच्चे बरामद हुए हैं और उनको परिजनों से मिलवाया है उनके एसीपी को भी सम्मानित किया गया है। मौके पर दादरी कोतवाली क्षेत्र के कोट गांव की नहर में गृहक्लेश से तंग आकर आत्महत्या का प्रयास करने वाली महिला को बचाने वाली पीआरवी टीम को भी सम्मानित किया गया।
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उन्होंने बताया कि परिजनों से मिलाए गए कुल 78 बच्चों में से 47 ऐसे थे, जिनकी गुमशुदगी 2020-21 के दौरान दर्ज की गई थी। शेल्टर होम में रहने वाले 21 बच्चों और उनके परिजनों को मिलवाने का काम एएचटीयू टीम किया। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, चौराहे, ढाबे, मॉल आदि के पास घूमते 10 बच्चों को भी उनके परिजनों से मिलाया।
बचपन में कुछ घंटों के लिए बिछड़ गए थे पिता
हर बच्चा अपने परिवार की खुशियों का केंद्र होता है और यदि वह केंद्र ही न रहे तो परिवार की क्या हालत होती है। यह वह बखूबी जानती है। यह कहना है आईपीएस पुष्पांजलि का। उन्होंने अपने अनुभव सुनाते हुए बताया कि उनके पिता बचपन में कुछ घंटे के लिए परिवार से बिछड़ गए थे। इस बात को उनके दादा और पिता हमेशा परिवार के लोगों के साथ साझा करते थे। अब यह मौका मिला तो उन्होंने बच्चों को परिजनों से मिलने में खूब मेहनत की और अधीनस्थों को भी प्रेरित किया।
साढ़े 6 वर्ष बाद परिजनों से मिली मिली आगरा से गुम हुई बच्ची
आगरा के पाकीपुरा उर्फ पारतीपुरा गांव से साढे़ 4 वर्ष की अनु रहस्यमय हालत में लापता हो गई थी। किसी तरह गाजियाबाद में मिली तो उसे शेल्टर होम में रखा गया। वह केवल अपना और गांव का नाम बता पाती थी। इस एक माह के अभियान में काफी मुश्किल के बाद आगरा के गांव की तलाश की गई। ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने एक व्यक्ति की बच्ची गायब होने की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने व्हाटस एप से मौजूदा फोटो परिजनों को भेजा तो वह पहचान नहीं पाए। बच्ची अब करीब 11 साल की हो चुकी हैं, लेकिन जब उसी बच्ची का पुराना फोटो परिजनों को भेजा तो वह पहचान गए।
रिपोर्ट दर्ज कराने के 8 घंटे में मूकबधिर बच्चे को तलाशा
मूलरूप से बिहार निवासी श्याम मंडल सपरिवार रोजा-जलालपुर गांव में रहते हैं। उनका एक बेटा मूकबधिर है। पिछले दिनों घर से कहीं चला गया था। तीन दिन बाद भी जब बच्चे का कोई सुराग नहीं लगा तो आस छोड़ चुके थे और फिर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। बच्चे के मामा अजय ने बताया कि नोएडा पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कराने के 8 घंटे में बच्चे को तलाश कर सौंप दिया।
होमशेल्टर के 21 बच्चों को परिजनों से मिलवाया : लव कुमार
अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था लव कुमार ने बताया कि इस बार शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों को भी परिजनों से मिलवाने का प्रयास किया गया था। शेल्टर होम में कई वर्षों से रह रहे 21 बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया गया।
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