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Noida News: खुला नाला बना मौत का गड्ढा, युवक की गिरकर गई जान

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नोएडा गढ़ी के पास इसी नाले में गिरकर हुई थी युवक की मौत। संवाद
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- गढ़ी गोलचक्कर के सर्विस रोड पर हादसा, कोतवाली सेक्टर-63 पुलिस कर रही मामले की जांच
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गढ़ी गोलचक्कर के पास सर्विस रोड पर बने नाले में गिरकर करीब 35 वर्षीय युवक की जान चली गई। युवक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। घटनास्थल पर नाले की दीवार काफी नीची है और एक बड़ा हिस्सा खुला हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सर्विस रोड सुनसान रहने और आसपास शराब की दो दुकानों के कारण यहां दिनभर भीड़ रहती है लेकिन मौके पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
पुलिस के मुताबिक रविवार को गढ़ी गोलचक्कर के पास नाले में युवक के शव मिलने की सूचना मिली थी। उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं दिख रहे थे। नाले में पानी कम और कूड़ा-कचरा भरा हुआ है। पुलिस ने शराब के नशे में संतुलन बिगड़ने से नाले में गिरने की आशंका जताई है। हालांकि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी। एसीपी दीक्षा सिंह ने बताया कि युवक की शिनाख्त नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।
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हर बार बरती जाती है लापरवाही
नोएडा प्राधिकरण हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई, टूटे स्लैब बदलने और जलभराव वाले स्थानों को दुरुस्त करने के दावे करता है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में खुले नाले, टूटे स्लैब और जलनिकासी की खराब व्यवस्था बनी हुई है। इस वर्ष नोएडा में चार ऐसी बड़ी घटनाएं हुई है। जिससे व्यवस्था की पोल खुली है।
लोग बोले, हादसे का इंतजार करते हैं अधिकारी
हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मुआयना किया। कर्मचारियों का दावा है कि नाले को दुरुस्त कराने के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। लेकिन सवाल यह है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक नाले को सुरक्षित करने या ढकने के लिए अस्थायी इंतजाम क्यों नहीं किए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले की बदहाल स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार करते हैं।
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लापरवाही का इतिहास: नहीं लिया गया युवराज प्रकरण से सबक
गढ़ी गोलचक्कर की इस घटना ने नोएडा प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था और दावों की पोल खोल दी है। शहर के कई हिस्सों, विशेषकर गांवों और औद्योगिक क्षेत्रों में आज भी बड़े-बड़े नाले बिना रेलिंग या सुरक्षा दीवारों के खुले पड़े हैं। पहले भी ऐसी घटनाओं में कई लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकला है। हर बड़े हादसे के बाद जांच और सुरक्षा के लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। मानसून या सामान्य दिनों में भी टूटे स्लैब, गायब ढक्कन और सुरक्षा रेलिंग का अभाव लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। जनवरी में सेक्टर-150 में कार समेत पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरकर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। तब सिस्टम पर सवाल खड़े हुए थे। मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी। युवराज की मौत के मामले के बाद भी नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे थे। उस घटना के बाद खुले नालों और जलभराव वाले स्थानों को सुरक्षित बनाने, टूटे स्लैब बदलने और नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे।


जिले में खुले नालों और गड्ढों में मौतों का सिलसिला
जनवरी 2026: सेक्टर-150 में पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत।
अप्रैल 2026: सेक्टर-94 में बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में डूबने से छात्र हर्षित भट्ट की मौत।
जुलाई 2026: सेक्टर-58 में बारिश और जलभराव के दौरान नाले के टूटे स्लैब से गिरने पर इंजीनियर आर्यन की मौत।
26 जुलाई 2026: ग्रेटर नोएडा की कलाधाम सोसाइटी में गड्ढे में गिरकर मासूम की मौत
29 जुलाई 2026: मामूरा में खुले नाले में गिरने से बुजुर्ग रुमाल सिंह की मौत।
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