ग्रेटर नोएडा(संवाद)। बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। अस्पताल की मानसिक स्वास्थ्य ओपीडी में आने वाले करीब 10 प्रतिशत मरीज 18 साल से कम उम्र के हैं। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, 25 प्रतिशत मरीज 18 से 29 वर्ष और 65 प्रतिशत मरीज 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं। मरीजों में पुरुषों और महिलाओं का अनुपात बराबर है। ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. सारस प्रसाद ने बताया कि हाल ही में उनके पास 13 साल का एक बच्चा आया, जो रोजाना 10 से 12 घंटे ऑनलाइन गेम खेलता था। धीरे-धीरे उसने लोगों से मिलना-जुलना कम कर दिया। उसके व्यवहार में चिड़चिड़ापन और दूसरों पर शक करने जैसी समस्याएं बढ़ने लगीं। स्थिति गंभीर होने पर उसे भर्ती कर उपचार देना पड़ा। वहीं मनोचिकित्सक डॉ. कुणाल कुमार ने बताया कि बच्चों को नियमित नींद, शारीरिक गतिविधियां, परिवार और दोस्तों के साथ संवाद तथा स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।