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चेक बाउंस मामले में बिल्डर को एक वर्ष कारावास

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चेक बाउंस के मामले में एक साल की कैद, नौ लाख जुर्माना
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ग्रेटर नोएडा। चेक बाउंस होने के मामले में सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट एवं एसीजेएम ओमपाल सिंह की अदालत ने बिल्डर के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को एक वर्ष की कैद और नौ लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने में से आठ लाख 95 हजार रुपये खरीदार को देने के आदेश दिए हैं।
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नोएडा की पूर्वांचल सिल्वर सिटी सोसायटी निवासी विनोद कुमार छाबड़ा ने आईएफआई रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर व नीरज शर्मा और उसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता धीरज शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विनोद के अनुसार उन्होंने कोंडली बांगर के निकट बुद्ध एंक्लेव में जुलाई 2012 में 100 वर्ग गज का प्लॉट बुक कराया था। उन्होंने 6.80 लाख रुपये एडवांस दिए थे। दिसंबर 2012 में प्लॉट का पजेशन मिलना था, लेकिन नहीं मिला। कई बार चक्कर लगाने पर 2013 में बिल्डर की ओर से विनोद को कुल रकम सात लाख 95 हजार एक सौ रुपये लौटाने के लिए चेक दिया। बैंक खाते में लगाने पर चेक बाउंस हो गया। परेशान विनोद ने कोर्ट में परिवाद दर्ज कराते हुए दोगुनी रकम की मांग की। सुनवाई के दौरान बिल्डर की ओर से कहा गया कि खरीदार की ओर से उसके खिलाफ न्यायालय में दो मुकदमे में चल रहे हैं। दोनों मुकदमों से संबंधित रकम में से वह चार लाख 80 हजार रुपये लौटा चुका है। शेष रकम 12 लाख रुपये वह एफडी की ब्याज से खरीदार को लौटाना चाहते हैं। रकम लौटाने के लिए बिल्डर ने तीन माह का समय मांगा। अदालत ने चेक बाउंस के मामले में अनुच्छेद 138 (परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881) के तहत धीरज को दोषी माना और एक वर्ष के साधारण कारावास और करीब नौ लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माने की रकम न देने पर छह वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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