देश के दूसरे मेनटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉलिंग सेंटर (एमआरओ) व नोएडा एयरपोर्ट का तीसरा रनवे बनाने की तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ने एक और कदम बढ़ा दिया है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। दूसरे चरण में जिन छह गांवों की 1365 हेक्टेयर जमीन ली जानी है, उसमें से कुल 1186 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जाएगी। शेष जमीन सरकारी है। वह नियाल के खाते में खुद चढ़ जाएगी। इसकी सोशल इंपैक्ट असिस्मेंट (एसआईए) रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी शासन ने जीबीयू को दी है। 15 जून तक रिपोर्ट तैयार करने की अंतिम तिथि है।
दरअसल, एयरपोर्ट में कुल पांच रनवे प्रस्तावित हैं, जिनमें से शुरुआत के दो रनवे बनाने का जिम्मा ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी को मिल चुका है। अब तीसरा रनवे और एमआरओ सेंटर बनाने की तैयारी है। इसके लिए 1365 हेक्टेयर जमीन की दरकार है। ये जमीन जेवर के छह गांवों करौली बांगर, कुरैब, बीरमपुर, दयानतपुर, रन्हेरा और मुंढेरा में ली जाएगी। इसका एसआईए तैयार करने की जिम्मेदारी शासन ने गौतमबुद्ध विवि को दी है। पहले चरण के छह गांवों की जमीन लेने के लिए भी एसआईए रिपोर्ट जीबीयू ने ही तैयार की थी। बता दें कि तीसरा रनवे बनने से इस एयरपोर्ट से हवाई सफर करने वाले यात्रियों की 2050 तक की जरूरत पूरी हो सकेगी।
एक नजर गांव व जमीन पर
करौली बांगर 160 हेक्टेयर
कुरैब 326 हेक्टेयर
दयानतपुर 145 हेक्टेयर
रन्हेरा 458 हेक्टेयर
मुढरह 47 हेक्टेयर
बीरमपुर 49 हेक्टेयर
शासन ने दूसरे चरण की जमीन अधिग्रहण से पहले एसआईए कराने की जिम्मेदारी जीबीयू को सौंपी है। 15 जून तक यह रिपोर्ट आ जाएगी। उसके बाद जमीन अधिगृहीत की जाएगी।
- डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ नियाल
मास्टर प्लान पर 24 को बोर्ड बैठक में लगेगी मुहर
नोएडा एयरपोर्ट के पहले चरण का काम शुरू करने से पहले ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन की एनओसी बुधवार को मिल गई है। इससे पहले रक्षा मंत्रालय, नागर विमानन महानिदेशालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से एनओसी पहले ही आ चुकी है। इन संस्थाओं ने कुछ सुझाव दिए हैं। ज्यूरिख कंपनी इन सुझावों को नोएडा एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में शामिल कर फाइनल प्लान जमा करेगी। यह प्लान 24 अप्रैल से पहले आ जाएगा। इसी दिन यीडा की बोर्ड बैठक है। उसमें इस प्लान पर मुहर लग जाएगी। उसके बाद नियाल की बोर्ड बैठक होगी। तब जाकर मास्टर प्लान फाइनल माना जाएगा।