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Noida News: स्पेशल केयर यूनिट के जरिए 117 बच्चों को दिया गया मरहम

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स्पेशल केयर यूनिट के जरिए 117 बच्चों को दिया गया मरहम
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- निजी अस्पताल में एक दिन में आता है 10 से 15 हजार का खर्चा
- 15 जनवरी को उप मुख्यमंत्री ने किया था उद्घाटन

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिला अस्पताल की स्पेशल केयर यूनिट ने अलग-अलग बीमारी से पीड़ित 117 बच्चों को मरहम दिया है। यह बच्चे जन्म के दौरान पीलिया, क्षणिक तीव्र श्वास, सेप्टिसीमिया समेत कई बीमारियों से पीड़ित थे। इन बच्चों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि रोजाना चार से पांच बच्चे भर्ती हो रहे हैं। यह यूनिट आर्थिक रूप से कमजोर वर्गाें के लिए वरदान साबित हो रही है। 15 जनवरी को उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इसका उद्घाटन किया।

स्पेशल केयर यूनिट नहीं होने से बच्चों को चाइल्ड पीजीआई या दिल्ली के अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इस वजह से चाइल्ड पीजीआई पर भार बढ़ गया था। सस्ता इलाज होने की वजह से शहर के अधिकतर अभिभावक चाइल्ड पीजीआई में आते हैं। इस वजह से बेड की कमी रहती है। मजबूरी में उनको निजी अस्पताल जाना पड़ता है। जहां पर एक दिन का 10 से 15 हजार रुपये का खर्चा आता है। यह सभी के लिए वहन करना संभव नहीं है।
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इसलिए जिला अस्पताल में 15 फरवरी को उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने नवजात शिशुओं के लिए 12 बेड का स्पेशल केयर यूनिट का उद्घाटन किया। इसके लिए शासन स्तर से अलग से बजट और डॉक्टरों की टीम नियुक्त की गई है। डॉ. अरुण, डॉ. आशीष, डॉ. अरविंद्र और डॉ. प्रिया के अलावा चार नर्सिंग स्टाफ तैनात शिफ्ट के अनुसार कार्य कर रहे हैं। धीरे-धीरे इसमें और भी सुविधा बढ़ाई जाएगी।

गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को भी मिला इलाज
यहां पर पीलिया, क्षणिक तीव्र श्वास (टीटीएन), टीटीएन एक श्वसन विकार है, जो आमतौर पर प्रसव के तुरंत बाद या समय पर पैदा होने वाले शिशुओं में देखा जाता है। इसके अलावा, सेप्टिसीमिया, मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम, यह नवजात शिशु में गंभीर बीमारी और मृत्यु का प्रमुख कारण है, जो लगभग 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत जन्मों में होता है। इसके अलावा भी कई बीमारी के बच्चों का इलाज किया गया है।
अब तक 117 बच्चों का इलाज हो चुका है। अभी भी तीन बच्चे भर्ती हैं। इस यूनिट के शुरू होने से नवजात को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। इससे शिशु के साथ प्रसूता को भी अस्पतालों के चक्कर काटने से छूटकारा मिल गया है।
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डॉ. रेनू अग्रवाल, सीएमएस
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