-जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र से होगी शुरू, स्टेडिंग कमेटी की बैठक में आज लाया जाएगा इस आशय का प्रस्ताव
-पास होने के बाद इसे एकेडेमिक काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा
-विवि में सबसे ज्यादा है साइकोलॉजी की डिमांड, 12 कॉलेज में होती है पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में अगले सत्र से दूरस्थ माध्यम से बीए मनोविज्ञान ऑनर्स की पढ़ाई कर सकेंगे। डीयू के दूरस्थ एवं सतत शिक्षा विभाग के स्कूल ऑफ ओपन लर्निग में जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र से इसे शुरू करने की तैयारी है। इस आशय का प्रस्ताव बृहस्पतिवार को होने वाली स्टेडिंग कमेटी की बैठक में रखा जाएगा। वहां से पास होने के बाद इसे एकेडेमिक काउंंसिल की बैठक में ले जाया जाएगा। यूजी स्तर पर इस कोर्स को चलाने के बाद काउंसलिंग डिप्लोमा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
दूरस्थ एवं सतत शिक्षा विभाग की डीन व विभागाध्यक्ष प्रो. पायल मागो ने बताया कि इस बार डीयू से सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाले कोर्स के संबंध में एक डेटा लिया गया है। डेटा से पता चला कि साइकोलॉजी ऑनर्स सबसे ज्यादा डिमांड में है। लेकिन सबको इस कोर्स में दाखिला नहीं मिल पाता है। ऐसे में इस कोर्स को दूरस्थ माध्यम से शुरू करने का फैसला लिया गया। यह रोजगारपरक कोर्स है और इसे करने से छात्रों को लाभ मिलेगा। प्रो. पायल ने बताया कि इसे अभी स्टैडिंग कमेटी में रखा जा रहा है और वहां से पास हो जाने के बाद इसे एकेडेमिक काउंसिल में रखा जाएगा। दोनों जगह से इसे मंजूरी मिल जाएगी। इस कोर्स के लिए विभाग फैकल्टी नियुक्त करेगा और नियमित कॉलेज में जिस पाठ्यक्रम से पढ़ाई होती है वही पाठ्यक्रम इस कोर्स के लिए रहेगा।
इस कोर्स की पढ़ाई के लिए प्रैक्टिकल लैब भी तैयार की जाएंगी। इसके बाद काउंसलिंग डिप्लोमा भी शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इससे यूजी स्तर पर पढ़ाई करने के बाद डिप्लोमा करने से छात्रों को लाभ मिलेगा। नियमित कॉलेजों में कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट से जिन्हें बीए ऑनर्स मनोविज्ञान में दाखिला नहीं मिलेगा, उन्हें दूरस्थ में दाखिला मिल जाएगा। दरअसल, दूरस्थ शिक्षा विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार नियमित कॉलेज के किसी कोर्स के मुकाबले में तीन गुना सीट एसओएल में होती हैं। मालूम हो कि वर्तमान में डीयू के 12 नियमित कॉलेजों में बीए ऑनर्स साइकोलॉजी की पढ़ाई होती है। वर्ष 2021 तक जब कट ऑफ से दाखिले होते थे तब इस कोर्स की कट ऑफ 99-100 फीसदी तक जाती थी। ऐसे में इस कोर्स की डिमांड का अंदाजा लगाया जा सकता है।