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Noida News: अब प्रदूषित मिट्टी में भी उग सकेगी शुद्ध सरसों

Mon, 06 Oct 2025 12:57 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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अमर उजाला ब्यूरो
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पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी के एक ताजा शोध के माध्यम से प्रदूषित मिट्टी में सरसों या कैनोला की एक किस्म उगाए जा सकने की विधि खोजी गई है। यह शोध शोधकर्ता डॉ. गुरवरिंदर कौर द्वारा यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रोफेसर गीतिका सरहिंदी के नेतृत्व में किया गया है। इस शोध के परिणाम अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित विज्ञान सम्मेलन आईआरसी-2023 में भी इसको प्रस्तुत किया जा चुका है। इस शोध के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से वित्तीय सहायता भी प्राप्त हुई है।
प्रोफेसर गीतिका सरहिंदी लाभकारी सूक्ष्मजीवों की मदद से फसलों को मौसमी तनाव से बचाने और पौधों के अपने हार्मोनों के माध्यम से विकास संबंधी अपनी शोधों के लिए जानी जाती हैं। प्रो. गीतिका ने नवीनतम शोध के बारे में बात करते हुए बताया कि इसके लिए उन्होंने पौधों में पाए जाने वाले एक विशेष हार्मोन और एक फंगस का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि 28-एचबीएल (28 होमोब्रासियानोलाइड) नामक यह हार्मोन पौधों को कैडमियम प्रदूषण से उत्पन्न तनाव से निपटने में मदद करता है।
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इसी तरह पिरिफॉर्मोस्पोरा इंडिका नामक एक लाभकारी फंगस का भी इस्तेमाल किया गया है जो कि पौधे की जड़ों में रहता है और उसकी वृद्धि और विकास में मदद करता है। उन्होंने बताया कि इस शोध के परिणामों से पता चला है कि ये दोनों मिलकर पौधे को विषैले कैडमियम के प्रभाव से बचाते हैं। ये विषैले कैडमियम को जड़ों में रोक देते हैं जिससे यह पौधे के खाने योग्य हिस्से तक न पहुंच सके।
शोधकर्ता डॉ. गुरवरिंदर कौर ने शोध के महत्व के बारे में बात करते हुए कहा कि कैडमियम स्वास्थ्य के लिए विषैला होता है। इस विधि के प्रयोग से कैडमियम का प्रभाव जड़ों तक सीमित रहता है। सरसों के पौधे की जड़ों का उपयोग न मानव उपभोग के लिए होता है और न पशुओं के चारे के लिए। उन्होंने कहा कि प्रदूषित मिट्टी को प्राकृतिक तरीके से साफ करने की दृष्टि से इस विधि का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि यह विधि रसायनों के उपयोग से मुक्त, टिकाऊ और प्रकृति-अनुकूल कृषि को प्रोत्साहित करती है।
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पीयू के वीसी डॉ. जगदीप सिंह ने शोधकर्ता और पर्यवेक्षक को विशेष रूप से बधाई दी और उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि रसायन मुक्त कृषि के बढ़ते महत्व के युग में इस तरह के शोध की अपनी विशेष प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में और अधिक शोध किए जाने चाहिए।
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