अब जिला अस्पताल में मिलेगी आईसीयू की सुविधा
- अस्पताल की पहली मंजिल पर 20 बेड के तीन आईसीयू कराए जा रहे तैयार
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले के सरकारी अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार मरीजों का उपचार आसान होगा। इसके लिए अस्पताल में तीन इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) तैयार कराए जा रहे हैं। तीनों आईसीयू में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर सहित तमाम जरूरी सुविधाओं से युक्त 20 बेड का इंतजाम किया जा रहा है। आईसीयू की सुविधा शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को हायर सेंटर में रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के शो विंडो नोएडा के जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना तकरीबन तीन हजार मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। हालांकि आज तक सरकारी अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सेक्टर-39 में 546 करोड़ रुपये की लागत से बनी अस्पताल की नई इमारत में आईसीयू का प्रावधान किया गया है। कोविड के दौरान सांसों के संकट से जूझ रहे मरीजों के लिए अस्थायी आईसीयू शुरू किया गया था। संक्रमण का खतरा कम होते ही बेड से लेकर वेंटिलेटर तक खोलकर स्टोर रूम में डाल दिए गए। लाखों रुपये की कीमत के वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं।
नई मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. रेनू अग्रवाल ने अस्पताल की पहली मंजिल पर आपातकालीन विभाग के साथ बने तीनों आईसीयू कक्षों में बेड से लेकर वेंटिलेटर तक का इंतजाम कराने का काम शुरू कर दिया है। सभी कक्षों में ऑक्सीजन की पाइपलाइन डली हुई है, इनकी जांच कराई जा रही है। सीएमएस ने बताया कि जल्द ही मरीजों को आईसीयू की सुविधा मिलने लगेगी। सड़क दुर्घटना में घायल या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उपचार के लिए दिल्ली या फिर निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
कोविड में तैनात रहे डॉक्टरों होंगे तैनात
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आईसीयू के संचालन में स्टाफ की कमी बड़ी बाधा है, लेकिन इसका समाधान निकाला जा रहा है। जिन डॉक्टरों की तैनाती जनपद में कोविड के दौरान की गई थी, उनकी तैनाती आईसीयू में की जा रही है। स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की सूची भी बनाई जा रही है। साथ ही, एमडी मेडिसिन और कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग से वार्ता शुरू कर दी गई है।
दो सीटी-स्कैन सेंटर जल्द होंगे शुरू
नए जिला अस्पताल में दो सीटी-स्कैन सेंटर शुरू करने का काम जारी है। अस्पताल के दूसरे तल पर रेडियोलॉजी विभाग के साथ एक सीटी-स्कैन सेंटर तैयार किया जा चुका है, जबकि दूसरे का काम भूतल पर चल रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इसे भी दूसरे तल पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसी महीने यह सुविधा भी यहीं मिलने लगेगी।
रैंप नहीं तो एस्केलेटर से चलेगा काम
आठ मंजिला अस्पताल के निर्माण के दौरान एक बड़ी भूल का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। अस्पताल में रैंप की सुविधा नहीं दी गई है, जबकि लिफ्ट और सीढि़यां उपलब्ध हैं। बिजली गुल होने पर लिफ्ट बंद हो जाती है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को ऊपरी तल से नीचे लाने और ऊपर लेने जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए अस्पताल प्रशासन एस्केलेटर लगवाने की योजना बना रहा है। इसके लिए कंपनी तलाशी जा रही है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।