ओबीसी प्रमाण पत्र उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अफसरशाही का विवाद और गहराता जा रहा है। अब एक दानिक्स अधिकारी ने विशेष सचिव (सेवाएं) वाईवीवीजे राजशेखर पर संगीन आरोप लगाए हैं। फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र के आधार पर लाभ लेने का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। इस मामले में विधानसभा कमेटी ने 14 जून को राजशेखर को पेश होने के लिए कहा है, लेकिन विशेष सचिव ने इससे इंकार किया है।
विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में अधिकारी ने आरोप लगाया है कि दानिक्स कैडर में विशेष सचिव (सतर्कता) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे राजशेखर उनसे दो साल वरिष्ठ हैं। उन्होंने राजशेखर से उनके ओबीसी के बारे में सवाल किया तो वे निजी दुश्मन मानने लगे। पहले उनसे अच्छे संबंध थे, लेकिन बाद में बदला लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वर्ष 2000 से उनके बर्ताव में लगातार बदलाव होने लगे और प्रतिशोध व दुर्भावना से प्रेरित हैं। सिविल सेवा परीक्षा 1994 (1995 का बैच) के बैच से आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण की सुविधा दी गई। फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र के आधार पर मुख्य परीक्षा की दूसरी सूची में राजशेखर का नाम आया। उन्होंने झूठा दावा किया कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। इसी आधार पर उन्हें दानिक्स आवंटित किया गया। वाईवीवीजे राजशेखर ने तत्कालीन आंध्रप्रदेश के राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मदद से झूठा जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया, इसलिए इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।