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नोएडा में मनचलों पर शिकंजा: नौ महीने में 33 हजार चालान, कानफोड़ू हॉर्न-साइलेंसर और हूटर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

Thu, 29 Oct 2026 11:14 AM IST
अनुज कुमार ऋषभ कौशल, अमर उजाला, नोएडा

सार

नोएडा में कानफोड़ू हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पिछले नौ माह में 33 हजार से अधिक वाहनों के चालान किए गए हैं। शांत क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण के मानक तय होने के बावजूद मनमानी जारी है।
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चालान करती हुई ट्रैफिक पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों और रिहायशी इलाकों के आसपास कानफोड़ू हॉर्न बजाकर मनचले शहरवासियों का सुकून छीन रहे हैं। ऐसे वाहन चालकों पर ट्रैफिक पुलिस ने शिकंजा कसा है। ट्रैफिक पुलिस ने जनवरी से सितंबर तक नौ महीने में इन उल्लंघनों के खिलाफ 33,018 चालान किए हैं। इनमें सबसे ज्यादा कार्रवाई प्रेशर हॉर्न लगाने वालों पर हुई है।
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ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, नौ महीने में प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल पर 15,760 चालान किए गए। वहीं, मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने पर 12,925 और वाहनों में हूटर-सायरन के इस्तेमाल पर 4,333 चालान हुए। कुल कार्रवाई में करीब 48 प्रतिशत मामले प्रेशर हॉर्न के हैं। मॉडिफाइड साइलेंसर के मामलों की हिस्सेदारी लगभग 39 प्रतिशत और हूटर-सायरन की करीब 13 प्रतिशत रही। 

आंकड़े बताते हैं कि तेज आवाज वाले उपकरणों का इस्तेमाल यातायात नियमों के पालन के साथ-साथ शहर के ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिहाज से भी चुनौती बना हुआ है। शहर में अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों और अन्य शांत क्षेत्रों के आसपास तेज हॉर्न बजाना लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है। इनमें सेक्टर 27 स्थित कैलाश अस्पताल, सेक्टर 110 स्थित यथार्थ अस्पताल, सेक्टर 11 स्थित मेट्रो अस्पताल और सेक्टर 50 स्थित मेदांता समेत अन्य अस्पताल के आसपास के इलाके शामिल हैं। 
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अस्पतालों में मरीजों को आराम की जरूरत होती है, जबकि स्कूलों के आसपास तेज आवाज से बच्चों और शिक्षण गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। स्कूल के मामले में सेक्टर 44 स्थित महामाया स्कूल, सेक्टर 62 स्थित इंडस वैली स्कूल, सेक्टर 132 स्थित प्रोमेथियस व डीपीएस पब्लिक स्कूल समेत अन्य स्कूल के आस पास के इलाके शामिल हैं। इसके बावजूद कुछ वाहन चालक दूसरों की सुविधा की परवाह किए बिना प्रेशर हॉर्न बजाते हैं। दिखावे और दूसरों पर रौब जमाने के लिए वाहनों में तेज आवाज वाले हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाने का चलन भी चिंता बढ़ा रहा है।

शांत क्षेत्रों में भी 1425 चालान
ट्रैफिक पुलिस ने प्रतिबंधित क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े उल्लंघनों पर भी कार्रवाई की है। जनवरी से सितंबर तक ऐसे 1425 चालान किए गए। शांत क्षेत्रों में अस्पतालों और अन्य निर्धारित स्थानों के आसपास शोर पर नियंत्रण रखने के लिए नियम लागू हैं। इसके बावजूद उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि तेज आवाज वाले हॉर्न, मॉडिफाइड साइलेंसर और अनधिकृत हूटर-सायरन के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

नौ महीने में कार्रवाई का ब्योरा

उल्लंघन - चालान
प्रेशर हॉर्न - 15,760
मॉडिफाइड साइलेंसर - 12,925
हूटर और सायरन - 4,333
प्रतिबंधित क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण - 1,425

मानक तय लेकिन मनमानी जारी
नोएडा। क्षेत्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने नोएडा के शांत क्षेत्रों में हो रहे ध्वनि प्रदूषण की जांच की। जहां सामने आया कि शांत क्षेत्र में तय मानक से ज्यादा शोर हो रहा है। ऐसे में लोगों की नींद उड़ रही है, तेज प्रेशर हॉर्न लोगों की नींद उड़ा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ स्कूली बच्चे और अस्पताल में मरीजों के लिए दुविधा बढ़ती जा रही है।

ध्वनि सीमा के मानक

क्षेत्र/जोन दिन-रात दर्ज ध्वनि प्रदूषण

औद्योगिक क्षेत्र 75/70 74.3/69.4
व्यवसायिक क्षेत्र 65/55 71/73.6
आवासीय क्षेत्र 55/45 71.5/68.4
साइलेंस जोन 50/40 78.2/76.3

आंकड़े क्षेत्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से प्राप्त)
: शहर में अस्पताल, स्कूल के आस पास के क्षेत्र को शांत क्षेत्र के तौर पर रखा जाता है। बोर्ड की तरफ से ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की जाती है, हालांकि यदि कोई शिकायत करता है तो उस पर कार्रवाई भी की जाती है। -ऋतेश तिवारी, क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड अधिकारी, नोएडा।

तेज प्रेशर हॉर्न लगवाना, साइलेंसर को मॉडिफाई कराना और वाहनों में हूटर-सायरन का अनधिकृत इस्तेमाल नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई की जाती है। -सैय्यद अब्बास अली, डीसीपी ट्रैफिक, गौतमबुद्ध नगर
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