बैगलेस स्कूल कम कर रहे बच्चों का बोझ
नई शिक्षा नीति के तहत कई स्कूलों में बैगलेस डे, स्किल एजुकेशन, प्रैक्टिकल लर्निंग और अनुभव आधारित पढ़ाई जैसे प्रयोग शुरू किए गए हैं। छोटे बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम करने के लिए खेल, कला, विज्ञान प्रयोग और सामाजिक गतिविधियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इससे छात्रों का समग्र विकास हो रहा है।
केंद्रीय विद्यालय, मिशनरी स्कूल के साथ सरकारी आवासीय स्कूल भी
नोएडा में हर वर्ग के लिए शिक्षा के माध्यम हैं। सेक्टर-24 में केंद्रीय विद्यालय है। पंचशील इंटर कॉलेज और महामाया बालिका इंटर कॉलेज आवासीय विद्यालय हैं। यहां बहुत कम फीस है। इसलिए देश के अलग-अलग राज्यों से लोग बच्चों का दाखिला कराने आते हैं।
रहती है दाखिले की होड़
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे किनारे और शहर में कई निजी स्कूल हैं जिनकी फीस ऊंची है। यहां 30 से 40 हजार रुपये तक महीने की सिर्फ ट्यूशन फीस है। कुछ स्कूलों में यह इससे भी ज्यादा है। ये स्कूल दिल्ली और एनसीआर के उच्च आय वर्ग के परिवारों की पसंद हैं। इनमें इतनी मांग है कि दाखिला लेना भी आसान नहीं है।
मेडिसिटी के नाम से जाना जाता है शहर
नोएडा के बसने के बाद मेडिकल सुविधाओं का अभाव था। सेक्टर-39 में सीएमओ कार्यालय के पास टीन शेड के नीचे जिला अस्पताल चलता था। अब विभिन्न चिकित्सा सुविधाओं से युक्त नोएडा के जिला अस्पताल की बिल्डिंग प्रदेश के सबसे बेहतरीन अस्पतालों में शुमार हो चुकी है। यहां पर रोजाना करीब 4,000 मरीजों की ओपीडी होती है। यहां के अस्पतालों में दूसरे देशों के लोग भी इलाज कराने आते हैं। अब अपने शहर को मेडिसिटी के नाम से भी जाना जाता है।
2011 से पहले जिला अस्पताल सेक्टर 39 में सीएमओ कार्यालय के पास टीन शेड के अंदर चलता था। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने राजकीय जिला संयुक्त चिकित्सालय का ड्रीम प्रोजेक्ट लॉन्च किया और सेक्टर 30 में अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू हुआ। निर्माण पूरा होने के बाद इसका उद्घाटन 2011 में हुआ। दूसरी ओर 2012 में चाइल्ड पीजीआई भी शुरू हो गया था। जब मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तब सेक्टर 39 में जिला अस्पताल के नाम पर नई बिल्डिंग बनाने का प्लान तैयार हुआ। 2020 में 519 करोड़ की लागत से बनी जिला अस्पताल की 8 मंजिला नई इमारत बनी। कोविड के कारण 2023 में यहां पर जिला अस्पताल शिफ्ट हो गया।
प्रदेश का एकमात्र चाइल्ड पीजीआई
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (चाइल्ड पीजीआई) के निदेशक डॉ. एके सिंह ने बताया कि संस्थान का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था और 2012 से यहां पर इलाज शुरू हो गया था। चाइल्ड पीजीआई प्रदेश का एकमात्र संस्थान है जहां बच्चों की गंभीर बीमारियों का इलाज उपलब्ध है और चाइल्ड हेल्थ पर पीजी भी होता है। यहां पीडियाट्रिक कार्डियोथेरेसिक सर्जरी, जेनेटिक विभाग, हिमेटो-ऑनकोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी उपलब्ध है।
आयुष्मान मरीजों को इलाज देने में जिला अव्वल
आयुष्मान मरीजों को इलाज देने के मामले में साचीज की रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम बुद्ध नगर पहले स्थान पर है। जिले में सबसे अधिक मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत इलाज दिया जा रहा है। इसके अलावा आयुष्मान योजना धारकों के कार्ड बनाने में कुल लक्ष्य के सापेक्ष गौतम बुद्ध नगर 11वीं रैंक पर है।
कैंसर की रोकथाम और शोध हो रहे
नोएडा सेक्टर 39 में मुख्य कैंसर संस्थान आईसीएमआर - नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च सेंटर है। यह केंद्र सरकार का संस्थान है, जो कैंसर की रोकथाम, अनुसंधान और प्रारंभिक निदान (स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मौखिक कैंसर) पर केंद्रित है। यहां कैंसर की रोकथाम पर शोध होता है और शुरुआती लक्षण वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है। यदि कैंसर की पुष्टि होती है, तो मरीजों को आगे के इलाज के लिए एम्स या दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
निजी अस्पतालों का अहम योगदान
आज नोएडा मेडिकल का हब बन चुका है और इसमें निजी अस्पतालों का विशेष योगदान है। शहर के अलग-अलग सेक्टर में बड़े-बड़े निजी अस्पताल खुल चुके हैं जहां पर सुपर स्पेशियलिटी सुविधा है और अधिकतर विदेशी यहीं पर अपना इलाज करवाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के पूर्व अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश में सबसे अधिक अंग प्रत्यारोपण के मामले नोएडा के निजी अस्पतालों में देखने को मिलते रहे हैं और इनमें सबसे अधिक विदेशी मरीज होते हैं।
टीबी का हो रहा बेहतर इलाज
टीबी की जांच के लिए पहले स्पुटम टेस्ट किया जाता था लेकिन अब सीबी नॉट मशीन की मदद से जांच हो रही है। ऐसे में इलाज आसान हो गया है। मरीज की पूरी डिटेल एक बार में ही आ जाती है।
टीकाकरण में भी अव्वल
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरके सिरोहा ने बताया टीकाकरण के क्षेत्र में जिले का स्वास्थ्य विभाग लगातार बेहतर काम कर रहा है। यही वजह है कि टीकाकरण का लक्ष्य हमेशा 100% से अधिक रहता है। ऐसे में कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित नहीं रहता है। इसके अलावा 9 स्वास्थ्य केंद्रों पर ह्युमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन भी शुरू कर दी गई है।
नोएडा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र - भंगेल
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - बरौला, ममूरा
- सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट - जिला अस्पताल
- न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर - जिला अस्पताल
- फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) - जिला अस्पताल
बेड क्षमता
- 240 बेड जिला अस्पताल में
- 288 बेड चाइल्ड पीजीआई में
- 15,000 से ज्यादा बेड हैं निजी अस्पतालों मे
नोएडा के जिला अस्पताल में 21 बेड का आईसीयू, डायलिसिस, वेंटीलेटर समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तर पर टास्क फोर्स कमेटी गठित की गई है। इसमें आईसीयू और ट्रॉमा सेंटर बनाने पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा टेली मानस सेवा, टेली रेडियोलॉजी और टेली मेडिसिन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। डॉ. पवन कुमार अरुण, महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
नोएडा आज मेडिकल हब बन चुका है और यहां पर विदेशों से इलाज करवाने वाले मरीज लगातार आ रहे हैं। चिकित्सा सुविधा बढ़ाने में निजी अस्पतालों का भी योगदान है और सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं भी विकसित हुई हैं। हर बीमारी का इलाज नोएडा में संभव है। -डॉ. सुनील कुमार शर्मा, पूर्व सीएमओ, गौतमबुद्ध नगर
सरकार की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर नए-नए अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। मरीजों के इलाज के लिए बड़ी-बड़ी मशीन आदि भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन सबके बीच सरकार को स्टाफ की बढ़ोतरी पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यदि स्टाफ कम रहेगा तो मरीजों का इलाज प्रभावित हो सकता है। -डॉ. वीबी ढाका, पूर्व सीएमओ गौतमबुद्ध नगर
चाइल्ड पीजीआई उत्तर प्रदेश सरकार का बहुत ही महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है। यह बच्चों की विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए बनाया गया है। इस संस्थान को अभी बहुत आगे बढ़ना है। हालांकि संस्थान में स्टाफ की बहुत कमी है। ऐसे में यहां पर काम करने वाले डॉक्टरों को प्रोत्साहन राशि देनी चाहिए। -डॉ. अजय सिंह, पूर्व निदेशक चाइल्ड पीजीआई व वर्तमान कुलपति, उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, सैफई।