कंपनी में पुराने मोबाइल व लैपटॉप आदि के रिपेयरिंग सेंटर के साथ पुराने मोबाइल फोन के पार्ट्स बदल कर नया मोबाइल फोन तैयार कर उसे ब्रांड नेम एक्सट्रा कवर देकर बाजार में बेचा जा रहा था। जिसमें नामी कंपनी वन प्लस, ओप्पो, एप्पल, एमआई आदि के नाम पर सस्ते दामों में बाजार में बेच देते थे। जिस मोबाइल की कीमत 75 हजार से एक लाख रुपये तक होती है, उसे आरोपी 20 से 25 हजार रुपये में बेच देते थे। ये लोग अपनी कंपनी का ब्रांड नाम व मूल्य अंकित किए बिना ही बाजार में बेच रहे थे। खरीदार को बिल भी नहीं देते थे। इसके अलावा ये लोग खुद भी पुराने मोबाइल के पार्ट्स को असेंबल कर बाजार में बेचते थे। जिसकी कोई गारंटी नहीं होती थी। ये लोग घूम-घूम कर एनसीआर के शहरों में मोबाइल फोन बेच रहे थे।
मोबाइल खराब होने पर इन्हीं के यहां आकर ग्राहक उसे ठीक भी कराते थे। इसका कोई सर्विस सेंटर नहीं था। जिसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने आरोपी दिवाकर शर्मा को गिरफ्तार कर करीब 350 मोबाइल फोन समेत अन्य उपकरण बरामद किया है। मामले की सूचना जीएसटी विभाग को दी गई है। प्राथमिक छानबीन में पता चला है कि आरोपियों ने करीब पांच करोड़ से अधिक की जीएसटी की भी चोरी की है।
रजिस्टर से खुलेंगे राज
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि आरोपी के पास से एक लाल रंग की रजिस्टर बरामद हुई है। जिसमें कई लोगों के नाम लिखे हुए हैं। जिनसे इन्होंने थोक में पुराने व नए मोबाइल फोन खरीदें हैं। ऐसे लोगों के नाम और मोबाइल फोन की संख्या रजिस्टर में दर्ज हैं। पुलिस थोक में मोबाइल आरोपी को बेचने वालों के बारे में भी छानबीन कर रही है। आशंका जताई जा रही है इनमें से कुछ फोन चोरी या लूट आदि के भी हो सकते हैं।
पुलिस से बचने के लिए तुरंत बदल देते थे कर्मचारी
पुलिस की आंख में धूल झोंकने के लिए आरोपी अपने यहां कर्मचारियों को एक माह से भी कम समय के लिए नौकरी पर रखते थे। गिरफ्तार आरोपी दिवाकर ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि 20 से 25 दिन में अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देते थे, ताकि उनकी पोल न खुल सकें।