नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से नोएडा के निर्यातकों को नए बाजार, बेहतर सप्लाई चेन और निवेश के मोर्चे पर कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) के मुताबिक सम्मेलन के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल और आईटी-डिजिटल सर्विसेज से जुड़े निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
फियो के अध्यक्ष एससी रहलान ने कहा कि सम्मेलन से आसान बाजार पहुंच, मजबूत सप्लाई चेन, निवेश, तकनीकी सहयोग और बेहतर भुगतान व्यवस्था जैसे व्यावसायिक परिणाम निकलने की उम्मीद है। नोएडा के निर्यातकों के मुताबिक चीन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मशीनरी और औद्योगिक इनपुट की आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं यूएई भारतीय उत्पादों के लिए बड़ा बाजार बनकर सामने आया है। रूस और सऊदी अरब में नए खरीदार तलाशने के साथ ब्राजील, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका में कारोबार विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
एनएसईजेड से बीते साल यूएई से हुआ था 10 हजार करोड़ का निर्यात
एनएसईजेड के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 में यूएई को 10,532 करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात हुआ। इससे पहले वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 5,899 करोड़ रुपये था। इसी अवधि में अमेरिका को निर्यात 3,077 करोड़ से बढ़कर 5,546 करोड़ रुपये और ब्रिटेन को निर्यात 1,051 करोड़ से बढ़कर 1,150 करोड़ रुपये हुआ। निर्यातकों का मानना है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने से आने वाले समय में इन बाजारों में निर्यात को और गति मिल सकती है।
इन उत्पादों की बढ़ सकती है मांग
फियो के अनुसार ब्रिक्स सहयोगी देशों से इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल और टेक्सटाइल उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। नोएडा के एनएसईजेड और प्राधिकरणों के अधीन औद्योगिक क्षेत्रों में इन उत्पादों का बड़े स्तर पर निर्माण होता है। ऐसे में स्थानीय उद्योगों को नए खरीदार और निर्यात के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
उद्यमी बाेले
मेरे मुताबिक ब्रिक्स सम्मेलन एक बड़ा अवसर है। एक साथ कई नए देशों के बाजार में सीधे उत्पाद बेचने की राह खुल सकती है।-डॉ. आलोक कुमार गुप्ता, सचिव, एनईए
सबसे जरूरी है कि आयात-निर्यात की प्रक्रिया और आसान हो और माल की सुरक्षा की गारंटी मिले।- अमित सिंघल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती, नोएडा इकाई
ऐसे सम्मेलन के बाद कई देशों के राजदूतों के साथ बैठक होती है। वहां से उनके देशों के बाजार में सीधे प्रवेश का मौका मिल सकता है।-विमला बाथम, उद्यमी
रूस और ब्राजील हमारे पुराने साझेदार हैं, लेकिन उनके साथ आने वाले अन्य देशों के साथ निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।-नीतू सिंह, उद्यमी