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लखनउऊ और हरदोई समेत अन्य केंद्रों के ध्यानार्थ: लखनऊ का रुख करने की तैयारी में नोएडा के कारोबारी

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लखनऊ का रुख करने की तैयारी में नोएडा के टेक्सटाइल कारोबारी
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- पीएम मित्र योजना के तहत 1000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव

- एनएईसी की तरफ से 25 उद्यमियों की सूची तैयार कर शासन को भेजी

नंबर
- 3000 हजार से ज्यादा इकाइयां हैं जिले में रेडिमेड गारमेंट की

- 25000 हजार करोड़ है जिले से सालाना निर्यात

योगेश शर्मा

नोएडा। परिधानों की नगरी नोएडा के गारमेंट-टेक्सटाइल कारोबारी लखनऊ का रुख करने की तैयारी में जुटे हैं। लखनऊ और हरदोई में पीएम मित्र योजना के तहत विकसित होने जा रहे टेक्सटाइल पार्क में नोएडा के 25 से अधिक कारोबारी 1000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (एनएईसी) की तरफ से शासन को ऐसे उद्यमियों की सूची भेजी गई है। यूपी टेक्सटाइल एवं गारमेंट पॉलिसी-2022 के अंतर्गत सरकार की प्रोत्साहन नीति से प्रभावित जनपद के कई और कारोबारी लखनऊ और हरदोई में कारोबार के विस्तार की योजना बना रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत गौतमबुद्धनगर को रेडिमेड गारमेंट के लिए पहचाना जाता है। नोएडा को ‘सिटी ऑफ अपैरल’ का दर्जा भी मिल चुका है। रेडिमेड गारमेंट और टेक्सटाइल का हब कहे जाने वाले नोएडा के कारोबारी अब लखनऊ और हरदोई को इस क्षेत्र में अलग पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाते हुए नोएडा के कारोबारी लखनऊ और हरदोई में विकसित होने जा रहे एक हजार एकड़ के टेक्सटाइल पार्क में अपने कारोबार का विस्तार करेंगे। हाल में पीएम मित्र योजना के तहत टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के लिए एमओयू कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इसमें कुल 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव आए थे।
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नई नीति से मिलेगी गारमेंट सेक्टर को ‘ऑक्सीजन’
एनएईसी की अगुवाई में फिलहाल करीब 25 रेडिमेड गारमेंट और टेक्सटाइल कारोबारियों ने पीएम मित्र पार्क में एक हजार करोड़ रुपये के निवेश की रुचि दिखाई है। इस योजना से कई और कारोबारी जुड़ सकते हैं, क्योंकि यूपी की नई टेक्सटाइल व गारमेंट नीति को बांग्लादेश और वियतनाम की चुनौती झेल रहे इस उद्योग के लिए ऑक्सीजन की तरह माना जा रहा है।



श्रमिकों की समस्या होगी दूर



रेडिमेड गारमेंट व टेक्सटाइल उद्योग को सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली श्रेणी में गिना जाता है। इस उद्योग को चलाने वाले 90 प्रतिशत कुशल श्रमिक पूर्वांचल से आते हैं। लखनऊ और हरदोई में टेक्सटाइल पार्क विकसित होने के बाद श्रमिकों की कमी से उद्योगों को छुटकारा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, श्रमिकों को भी अपने घर के नजदीक रोजगार मिलेगा।



निर्यातक का हब नोएडा


नोएडा-ग्रेनो में रेडिमेड गारमेंट और टेक्सटाइल से जुड़े तीन हजार से ज्यादा इकाइयां हैं। इनमें नोएडा में लगभग 2200 व ग्रेटर नोएडा में 800 इकाइयां हैं। जिले में 1200 के आसपास रेडिमेड गारमेंट निर्यातक इकाइयां हैं। सालाना 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रेडिमेड गारमेंट का निर्यात जिले से होता है।
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लखनऊ-हरदोई में टेक्सटाइल पार्क को विकसित करने में नोएडा विशेष भूमिका निभाएगा। फिलहाल 25 कारोबारियों के एक हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। आने वाले दिनों में यह आंकड़ा बढ़ेगा। -ललित ठुकराल, चेयरमैन-एनएईसी



प्रमुख प्रोत्साहन

- भूमि लागत की 25 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।

- स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक छूट।

- मशीनरी की लागत की 25 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।

- इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में दस साल के लिए छूट।

- पांच वर्ष तक माल ढुलाई लागत की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।

- फ्लैटेड फैक्ट्री के किराये पर पांच साल के लिए 5 प्रतिशत सब्सिडी।
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