ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) के नाम से 500 करोड़ रुपये का मिट्टी खुदाई व भराई के लिए फर्जी ठेका किसी कंपनी को देने का मामला सामने आया है। आलम यह है कि नियाल के एक अधिकारी के हस्ताक्षर से यह पत्र मध्यप्रदेश के अनूपपुर के एक पते पर जारी हुआ है, लेकिन ठेका पाने वाली कंपनी का नाम नहीं लिखा है। मामले के खुलासे के बाद सीईओ के निर्देश पर यमुना प्राधिकरण के एसीईओ रविंद्र सिंह ने एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।
यमुना प्राधिकरण के अनुसार, 20 मार्च को एयरपोर्ट की जमीन पर मिट्टी खुदाई व भराई के लिए ठेका किसी कंपनी को आवंटित किए जाने से जुड़ा एक पत्र सामने आया है, जबकि यमुना प्राधिकरण ने ऐसा कोई पत्र किसी को नहीं भेजा है। इसमें नियाल और उत्तर प्रदेश सरकार का जिक्र कर फर्जी ढंग से जमीन से जुड़े कार्यों के लिए 5000 एकड़ में 500 करोड़ रुपये का ठेका देने की अनुमति दिखाई गई है। इसका बाकायदा वेलकम लेटर जारी किया गया है, जो बृहस्पतिवार को यीडा के सीईओ के पास पहुंच गया। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ। ठेके के एवज में ढाई फीसदी कमीशन की भी मौखिक जानकारी दी गई है। हालांकि, कंपनी के कॉलम में किसी का नाम नहीं लिखा है।
नियाल के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि यह पूरी तरह फर्जी ठेका है। नोएडा एयरपोर्ट का क्षेत्रफल 3200 एकड़ है, जबकि इस पत्र में 5000 एकड़ जमीन का जिक्र किया गया है। नियाल की तरफ से इस तरह का कोई पत्र किसी भी कंपनी को जारी नहीं किया गया है। एयरपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी और उसकी स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड की है। इसमें यूपी सरकार या फिर किसी अन्य प्राधिकरण की कोई भूमिका नहीं है।
एयरपोर्ट के ठेके के लिए झांसे में न आएं
सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने आगाह किया कि लोग ऐसे फर्जी पेपर के झांसे में न आएं। एयरपोर्ट के काम के आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। ज्यूरिख कंपनी ही एयरपोर्ट के कार्यों का टेंडर जारी करेगी। इस पत्र के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, बीटा टू थाना प्रभारी रामेश्वर का कहना है कि अभी उन्हें तहरीर नहीं मिली है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मिला सर्वे का जिम्मा
ग्रेटर नोएडा। एयरपोर्ट की 1334 हेक्टेयर जमीन का ऑप्टिकल लिमिटेशन सरफेस (ओएलएस) सर्वे होगा। यह सर्वे एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया करेगी। काम एक महीने में पूरा हो जाएगा। नियाल के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि पहले चरण की जमीन का ओएलएस सर्वे फिर से होगा। इससे पहले 2018 में राइट्स कंपनी ने यह सर्वे किया था। यह तीन साल में एक बार होना अनिवार्य है। सर्वे करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया 42 लाख रुपये का शुल्क लेगी। इसमें एयरपोर्ट की साइट में वाटर लेवल, मिट्टी की जांच, लैंडिंग और टेक ऑफ की साइट, पार्किंग क्षेत्र समेत तमाम बिंदुओं को देखा जाएगा। जहां पर विमान खड़ा होगा उसकी भी जांच की जाएगी। यह स्थितियां उसके अनुकूल हैं या नहीं, इन सभी बिंदुओं को सर्वे में शामिल किया जाएगा। ब्यूरो