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UP: यात्रियों की संख्या से तय होगा नोएडा एयरपोर्ट का विस्तार, सालाना 80 लाख यात्री होने पर शुरू होगा दूसरा चरण

Tue, 31 Dec 2024 05:54 AM IST
विजय पुंडीर शशांक मिश्र, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

पहले चरण में सालाना 80 लाख यात्रियों की संख्या होने के बाद दूसरे चरण का निर्माण शुरू होगा। ऐसे ही चार चरणों को पूरा करने में ढाई दशक तक का समय लग सकता है और तभी इस एयरपोर्ट को एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डे का तमगा भी मिलेगा।
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Noida Airport - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुविधाओं का विस्तार यात्रियों की संख्या के अनुसार शुरू किया जाएगा। एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के रूप में प्रस्तावित नोएडा हवाई अड्डे के दूसरे और आगे के चरण को शुरू करने में यात्रियों की संख्या अहम होगी।

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पहले चरण में सालाना 80 लाख यात्रियों की संख्या होने के बाद दूसरे चरण का निर्माण शुरू होगा। ऐसे ही चार चरणों को पूरा करने में ढाई दशक तक का समय लग सकता है और तभी इस एयरपोर्ट को एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डे का तमगा भी मिलेगा।

एयरपोर्ट पर अप्रैल अंत तक विमानों की उड़ान प्रस्तावित है। यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भले ही अभी की जा रही है। मगर, दूसरे और तीसरे चरण की शुरुआत यात्रियों की निर्धारित संख्या पूरी होने के बाद ही शुरू होगी। पहले चरण में 1.2 करोड़ सालाना यात्री क्षमता के साथ इसकी शुरुआत होगी। इस यात्री संख्या के 80 फीसदी का आंकड़ा पूरा होने के बाद तीन करोड़ यात्री क्षमता के साथ दूसरा चरण व पांच करोड़ यात्री क्षमता के साथ तीसरा चरण होगा।
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इसमें यात्रियों के तय लक्ष्य के 80 फीसदी का आंकड़ा पूरा होने के बाद ही अगले चरण का काम शुरू होने की प्रक्रिया होगी। सबसे अहम बात यह है कि दूसरे चरण में दो रने और तीसरे चौथे चरण में तीन रनवे को भी पूरा किया जाना है। चारों चरण पूरा होने पर परियोजना की कुल लागत 29561 करोड़ हो जाएगी। पहले चरण पूरा होने पर इसकी निर्माण लागत करीब छह हजार करोड़ रुपये होगी। एयरपोर्ट के विस्तार में एमआरओ के साथ एक रनवे बनेगा। यात्रियों की संख्या के साथ इसका विस्तार छह रनवे तक होगा। चारों चरण को पूरा करने के लिए वर्ष 2050 तक का लक्ष्य रखा गया है।

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आईजीआई की क्षमता 1.3 मिलियन मैट्रिक टन
आईजीआई कार्गो की क्षमता 1.3 मीलियन मैट्रिक टन की है। नोएडा एयरपोर्ट पर पहले चरण में कार्गो की क्षमता 1.2 मीलियन मैट्रिक टन की है जो कि बढ़ाकर 2.5 मिलियन मैट्रिक टन की जाएगी। चारों चरण के पूरे होने के बाद नोएडा एयरपोर्ट की कार्गो क्षमता 11 मीलियन मीट्रिक टन तक होगी। नायल के सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने बताया कि हम पहले चरण का काम अप्रैल से पहले पूरा कर एयरपोर्ट के व्यावसायिक संचालन की तैयारी में है। इसमें यात्रियों की निर्धारित संख्या पूरी होने के बाद अगले चरण का काम शुरू किया जाएगा।

नोएडा एयरपोर्ट पर अपना कार्गो हब बनाएगा एयरफोर्स
भारतीय वायु सेना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपना कार्गो हब बनाने की तैयारी में है। सेना की जरूरत के मुताबिक, आने वाली सामग्री इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आईजीआई) की जगह यहां आएगी। इस पूरी गतिविधि को सुचारू संपन्न कराने के लिए इंडियन एयरफोर्स ने यापल से कार्गो टर्मिनल बिल्डिंग में तीन हजार वर्गफीट जगह भी मांगी है। यापल की ओर से कार्यालय के लिए जगह दिए जाने की सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है और जल्द ही बाकी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।

दरअसल, भारतीय सेना सैन्य जरूरतों के अलावा अन्य सामग्रियों को विभिन्न देशों से आयात करती है। इसके लिए दिल्ली एयरपोर्ट को अपना बेस बनाया है। नोएडा एयरपोर्ट से विमानों का संचालन शुरू होने के साथ ही यहां कार्गो सुविधा भी शुरू होगी। नोएडा एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी और अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एयरफोर्स आयातित सामग्रियों को यहां से संचालित करने की तैयारी में है। दूसरी बात यह भी है कि दिल्ली में कार्गो का दबाव ज्यादा होने के चलते सेना दूसरे विकल्पों पर काम कर रही थी। इसी के चलते इंडियन एयरफोर्स ने अपना ऑफिस स्थापित करने के लिए एयरपोर्ट पर तैयार कार्गो टर्मिनल में 300 मीटर का स्पेस मांग लिया है। इस ऑफिस में इंडियन एयरफोर्स के अधिकारी व स्टाफ बैठेंगे। 

भारतीय वायुसेना ने कार्गो के लिए कार्यालय की मांग की है और हमने उन्हें सैद्धांतिक सहमति दे दी है। जल्द ही एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग में उनकी जगह तय कर दी जाएगी। -डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, नायल
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