दादरी स्थित अग्रसेन आदर्श इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य स्वर्गीय विजय शिशौदिया के बेटे अरुण ने बताया कि दो दिनों तक बीमार पिता को भर्ती कराने के लिए दादरी, सिकंद्राबाद और गाजियाबाद के अस्पतालों में भटकता रहा। भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन किसी पर असर नहीं पड़ा। अरुण ने बताया कि मैंने पिता को ऑक्सीजन नहीं मिलने से तड़प कर मरते देखा।
बिसाहड़ा निवासी अरुण ने बताया कि 5 दिन पहले बुखार आने पर पिता को दादरी के मोहन स्वरूप अस्पताल में दिखाया था। बुखार तो उतर गया था, लेकिन सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उन्हें दोबारा मोहन स्वरूप अस्पताल ले गए। एक्सरे कराने पर पता चला कि उनको कोरोना हो गया है। इसके बाद उन्हें सिकंद्राबाद के नवीन अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई। एंबुलेंस लेकर दो घंटे खड़े रहे, लेकिन बेड नहीं होने पर नवीन अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया।
अरुण ने बताया कि वहां से पिता को दादरी के दुर्गा अस्पताल लाया गया, लेकिन अस्पताल ने भर्ती करने से मना कर दिया। फिर गाजियाबाद के सर्वोदय अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां पर 2 घंटे के बाद एक पूर्व विधायक के फोन करने के बाद भर्ती किया गया। केवल ऑक्सीजन मिली, जबकि वेंटिलेटर नहीं मिल पाया। ऑक्सीजन देने के बाद दो घंटे में उनको निकाल दिया गया।
वहां से उनको नागर हॉस्पिटल में भर्ती किया। वहां पर ऑक्सीजन दी गई, लेकिन सुबह हटा दी गई। उनसे किसी को मिलने नहीं दिया गया। दोपहर में सूचना मिली कि दिल की धड़कने रुकने से मरीज मौत हो गई है। 35,000 रुपये जमा कराने के बाद शव दिया गया।