ग्रेटर नोएडा (संवाद)। बिसरख स्थित प्राचीन रावण मंदिर के पुजारी सत्यम शुक्ला ने बताया कि चातुर्मास चार महीने की धार्मिक अवधि होती है। इसमें आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और कुंवार (आश्विन) महीने शामिल होते हैं। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं इसलिए इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि चातुर्मास में भगवान शिव और माता तुलसी की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस अवधि में नियमित रूप से पूजा-अर्चना, व्रत, भजन और भगवान का ध्यान करना चाहिए।