कागजों तक सिमटी हिंडन व यमुना किनारे अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई
ग्रेटर नोएडा। जिला गंगा समिति ने हिंडन और यमुना किनारे अवैध निर्माण को हटाने का फैसला लिया था। तीनों प्राधिकरणों को तत्काल कार्रवाई शुरू करनी थी, लेकिन 20 दिन बाद भी समिति के फैसलों पर अमल नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि समिति के फैसले केवल बैठक तक सीमित है। डूब क्षेत्र में पक्के निर्माण कार्य पर रोक है, लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इसका पालन नहीं हो रहा है। हिंडन और यमुना के किनारे लगातार अवैध निर्माण हो रहे हैं। हिंडन के किनारे किसान चौक के पास से लखनवली गांव तक बड़े-बड़े मकान बन चुके हैं। जलपुरा, कुलेसरा, सुथ्याना, अलीवर्दीपुर, हल्दौनी समेत अन्य गांव में सबसे अधिक मकान बने हैं। कई जगह अवैध निर्माण नदी के किनारे तक पहुंच गया है। यमुना के डूब क्षेत्र में भी लगातार अवैध निर्माण हो रहा है। दोनों नदी का अस्तित्व बचाने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर गंगा समिति बनी है। जिसकी समय-समय पर बैठक होती है। इस माह पांच अक्तूबर को भी कलेक्ट्रेट में बैठक हुई थी। तय हुआ था कि हिंडन और यमुना की साफ-सफाई करनी है। इस संबंध में तीनों प्राधिकरण अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करेंगे। साथ ही दोनों नदी के किनारे अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई तत्काल शुरू करनी होगी। 20 दिन बाद भी कुछ नहीं हुआ।
दो साल में समिति नहीं उठा सकी ठोस कदम
पर्यावरणविद का कहना है कि जिला गंगा समिति का गठन वर्ष 2018 में हुआ था। समिति का काम हिंडन और यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना है। नदी को प्रदूषित करने वाले कारणों का पता लगाकर उस पर रोक लगानी है। अभियान चलाकर आसपास के लोगों जागरूक करना है, लेकिन जिले में किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई अभी तक देखने को नहीं मिली है। केवल कागजों पर समिति काम कर रही है।
फार्म हाउस और खेल मैदान भी बने
अभी तक हिंडन और यमुना के किनारे लोग मकान बना रहे थे, लेकिन पिछले कुछ साल में फार्म हाउस और खेल मैदानों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। लखनावली गांव से सफीपुर गांव के बीच बड़ी संख्या में फार्म हाउस बन गए हैं। जिनमें पक्का निर्माण कराया जा रहा है।
मूर्ति विसर्जन के नहीं थे इंतजाम
नवरात्र और दुर्गा महोत्सव को लेकर इस बार जिला प्रशासन और प्राधिकरण की तरफ से मूर्ति विसर्जन के इंतजाम नहीं किए गए थे। कुछ जगह आयोजकों ने अस्थायी तालाब बनाकर विसर्जन किया था, लेकिन बड़ी संख्या में कुलेसरा के पास लोगों ने हिंडन नदी में विसर्जन किया। जबकि, जहां विसर्जन पर रोक है।