सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नोएडा के सेक्टर 31 स्थित डी-5 कोठी के आसपास बुधवार शाम को कुछ लोग जमा हो गए और सुरेंद्र कोली के बरी होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। इस कांड के पीड़ित और लापता हुई 10 वर्षीय बच्ची ज्योति की मां सुनीता सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुनकर फफक पड़ीं। उन्होंने कहा कि मुझे इन दोनों के बरी होने की बात सुनकर विश्वास नहीं हो रहा है। उन्होंने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सीबीआई ने अच्छे तरीके से जांच नहीं की। इसका फायदा दोनों आरोपियों को मिला। ज्योति के पिता झब्बू लाल का कहना है कि 19 साल बीत जाने के बाद भी हम लोगों को न्याय नहीं मिला है।
19 साल पहले हुए वाकिये को याद करते हुए वह कहते हैं कि हम लोग पंढेर की कोठी के सामने कपड़े की ढुलाई और आयरन का काम कर रहे थे । तभी उनकी 10 साल की बेटी ज्योति दुपट्टे में पीको कराने दुकान से बाहर निकली और फिर वापस नहीं लौटी। जब झब्बू लाल और उनकी पत्नी बेटी को ढूंढने बाहर निकले तब डी-5 कोठी के सामने मोनिंदर पंढेर और सुरेंद्र मिल गए। उनसे जब बेटी के बारे में पूछा तब उन लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में जब निठारी कांड का खुलासा हुआ तब दोनों ने उसके सामने गुनाह कबूल किया था।
पंढेर व कोली ने पैर पकड़कर कहा था, गलती हो गई
निठारी कांड में लापता हुई ज्योति की मां सुनीता कहती हैं कि जब इस मामले की जांच होने लगी और पुलिस ने मोनिंदर पंढेर व सुरेंद्र कोली को पकड़ लिया था। तब थाने में पंढेर व कोली ने उसके पैर पकड़ कर कहा था कि उनसे गलती हो गई। अब 17 वर्ष बाद उन्हीं दोनों को बरी कर दिया गया।
क्या है निठारी कांड
निठारी गांव में रहने वाले बच्चे वर्ष 2004 से लापता हो रहे थे। बच्चों के लापता होने की जानकारी उनके परिजन थाना सेक्टर-20 पुलिस से लेकर बड़े पुलिस अधिकारियों तक से कर रहे थे। लेकिन पुलिस गुमशुदगी लिखने के बजाए उन्हें दुत्कार कर भगा देती थी। गायब होने वाले बच्चों में अधिकतर लड़कियां थीं। पायल नाम की एक युवती भी निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता हो गई। उसके पिता सेक्टर-19 में रह रहे नंदलाल ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक व जेसीबी के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर मोनिंदर सिंह पंधेर पर बेटी के अपहरण का शक जाहिर करते हुए पुलिस से शिकायत की।
पुलिस ने कार्रवाई के बजाय नंदलाल को ही बेटी से देह व्यापार करने का आरोप लगाते हुए भगा दिया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश देकर सीओ स्तर के अधिकारी को प्रगति आख्या के साथ कोर्ट में बुलाया। इसके बाद उसी साल 15 दिसंबर को अधिकारियों ने कोठी मालिक मोनिंदर सिंह व नौकर सुरेन्द्र कोली से पूछताछ की लेकिन रात में ही दबाव के चलते उन्हें छोड़ दिया।
पुलिस ने किया क्लीनचिट देने का प्रयास
हाईकोर्ट में पुलिस द्वारा बनाई गई रिपोर्ट को पेश किया गया। इसमें कोठी मालिक व उनके नौकर को क्लीन चिट देने का प्रयास करते हुए नंदलाल को ही आरोपी बनाने की कोशिश की गई। हाईकोर्ट ने एक बार फिर नंदलाल के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की और पुलिस को प्रगति आख्या देने के लिए कहा। इसी बीच लापता हुई पायल का मोबाइल फोन चालू हो गया।
पुलिस टीम उस मोबाइल फोन तक पहुंच गई और 29 दिसंबर को डी-5 कोठी के नौकर सुरेन्द्र कोली तक पहुंच गई। पुलिस ने उसे मालिक मोनिंदर सिंह के साथ सीओ आफिस में पूछताछ के लिए बुलाया और मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो सुरेन्द्र ने पायल के कत्ल केसाथ-साथ अन्य लापता बच्चों के कत्ल की कहानी बयां कर दी। पुलिस सुबह मारे गए बच्चों के कंकाल बरामद करने पहुंच गई। यह देख कर निठारी के लोग भड़क गए।
खूनी कोठी हुई खंडहर में तब्दील
खूनी कोठी डी-5 के सामने से गुजरने वाले बच्चे डरते नहीं। कोठी अब भूत बंगले जैसे वीरान व उजड़ी हुई नजर आती है। अंदर खड़ी पंधेर की कार को धूल की परतों ने ढक लिया है। बाहर गेट पर झाडिय़ों ने घेराबंदी कर ली है।
खूनी कोठी में इनके हुए थे कत्ल
1-रचना
2-रिम्पा हलधर
3-कु.बीना
7-कु.निशा
8-पुष्पा विश्वास
9-सतेन्द्र उर्फ मैक्स
10-दीपाली
11 सतेन्द्र उर्फ मैक्स
12-नंदा देवी
13-पिंकी सरकार
14-दीपिका उर्फ पायल
15-शेख रजा खान
16-सोनी
17-अंजली
18-आरती
19-एक अज्ञात युवती