नौवीं फेल मास्टरमाइंड, 11 साल में दो बार गया जेल
फर्जी कंपनियां बनाकर बैंकों से 23 करोड़ का लोन लेकर गबन करने का मामला
- फरीदाबाद में जालसाज नंदू से सीखा था फर्जीवाड़ा, फिर 11 साल तक बैंकों को ठगा
- मास्टरमाइंड के साथ काम करने वाले सभी आरोपियों के काम थे निर्धारित
सुशांत समदर्शी
नोएडा। नौवीं फेल मास्टरमाइंड मोहसिन खान 11 साल में दो बार जेल गया और जालसाजी गिरोह बनाकर 23 करोड़ का फर्जीवाड़ा कर लिया। मोहसिन वर्ष 2007 में फरीदाबाद अपना काम करने गया था तो वहां उसकी मुलाकात जालसाज नंदू से मुलाकात हो गई और उससे फर्जी डीएल, पैन कार्ड बनाना सीख लिया। इसके बाद गिरोह बनाकर वर्ष 2012 से अब तक लगातार अलग-अलग फर्जी कंपनी बनाकर 23 करोड़ रुपये का लोन लेकर बैंकों को ठगा। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद फर्जीवाड़ा का आंकड़ा 100 करोड़ तक भी पहुंच सकता है।
मोहसिन ने 2012 से ही फर्जी कागजात पर फर्जी कंपनी बनाना शुरू कर दिया और बैंक से लोन लेकर गबन करना शुरू कर दिया। इस दौरान इसके साथ एमबीए पास अमन शर्मा (29) आया। अमन विभिन्न बैंकों में खाते खोलने से लेकर सेल्स का काम करता था। अमन इस गिरोह से जुड़ने से पहले एयू फाइनेंस बैंक में काम कर चुका है। गिरफ्तार तनुज शर्मा (30) का भी गिरोह में अहम रोल था।
10वीं पास अमन आईसीआईसीआई बैंक में थर्ड पार्टी वेंडर और लोन रिकवरी का काम कर चुका है। लोन रिकवरी के दौरान इसकी मुलाकात मोहसिन से हुई थी। 20 वर्षीय बीकॉम पास वसीम अहमद 2014 से 2017 तक एक्सिस बैंक सेक्टर-51 नोएडा और आईटीओ स्थित स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में सेल्स का काम कर चुका है। यहां उसकी मुलाकात अमन से हुई और वह गिरोह में शामिल हो गया। एक्सिस बैंक में फर्जी कंपनियों के खाते खुलवाने में वसीम का अहम रोल होता था। अनुराग मोबाइल सेक्टर में विभिन्न कंपनियों जैसे मोबाइल स्टोर, सोनी मोबाइल, सैमसंग में सेल्स प्रमोशन का काम कर चुका है। मोबाइल खरीदने के दौरान मोहसिन से इसकी मुलाकात हुई और गैंग में शामिल हो गया।
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वेल्डिंग का काम करने वाला जीतू संभालता था कैश का काम
गैंग में सभी आरोपियों के काम अलग-अलग बंधे हुए थे। गिरफ्तार आरोपी जीतू दसवीं फेल है और वह मोहसिन का पड़ोसी है। यहीं से उसकी मोहसिन से जान पहचान हो गई। धीरे-धीरे मोहसिन के साथ जुड़ गया और उसका मुख्य काम एटीएम से पैसे निकालना और कैश का देख-रेख करते हुए उसका हिसाब-किताब रखना था। वह पैसे निकालकर मोहसिन और तनुज को देता था।
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जेल में हुई दोस्ती और बन गया फर्जी डायरेक्टर
गिरोह का अहम किरदार बीए पास रविकांत मिश्रा है। रविकांत फर्जी फाइनेंस के मामले में जेल में बंद था। तभी जेल में उसकी मुलाकात गिरोह के फरार आरोपी विकास से हुई। वहीं से दोनों मोहसिन के संपर्क में आए और फर्जी कंपनी का डायरेक्टर का काम रविकांत को मिल गया। कूट रचित दस्तावेज के आधार पर जो फर्जी कंपनियां बनाई जाती थी। उसमें यह फर्जी नामों से वह डायरेक्टर बनता था।
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गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई होगी
डीसीपी हरीश चंदर का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह है जिसने करोड़ों रुपये का फ्रॉड किया है। इस गिरोह के जालसाजों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई होगी। इनके गैंग का पुलिस पंजीकरण करेगी। इस गिरोह में शामिल आरोपियों की पहचान की जाएगी। इनकी संपत्तियों के बारे में पता किया जा रहा है।
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आधार कार्ड का इस्तेमाल के लिए 50 हजार रुपये
पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी गरीब या सामान्य लोगों की तलाश करते थे और उनका आधार कार्ड या अन्य आईडी कार्ड लेते थे। इसके लिए बीस हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक देते थे। इसके बाद ये आरोपी उसी आधार कार्ड को फर्जीवाड़ा कर दूसरा आधार कार्ड बनवाते थे जिसमें नाम पता सब उसी व्यक्ति का होता था। केवल मोबाइल नंबर जालसाजों का होता था।