जीडीए से सेवानिवृत्त अधिकारी के प्लॉट पर पौने चार करोड़ के लोन के लिए किया था आवेदन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने खाली प्लॉट कब्जाने और उस पर फर्जी लोन दिलवाने वाले गिरोह का खुलासा किया है। सरगना समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। आरोपियों ने जीडीए के रिटायर्ड अधिकारी के प्लॉट का कागज निकालकर अवैध फर्म बना ली थी और इस प्लॉट पर 3 करोड़ 75 लाख के लोन के लिए आवेदन किया था। इनके नाम बुलंदशहर खुर्जा निवासी देवाशीष शर्मा, खोड़ा के इतेश पोशवाल और उसका बेटा नितीश पोशवाल, अनिल भड़ाना, साहिबाबाद के नीरज झा, छिजारसी निवासी विभूति, गाजियाबाद के संजय शाह और दिल्ली के कप्तान व राकेश बिष्ट हैं।
डीसीपी रामबदन सिंह ने बताया कि दिल्ली निवासी केदारनाथ राय गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से सेवानिवृत हैं। इनका नोएडा के सेक्टर-55 में 375 वर्गमीटर का प्लॉट है। 14 फरवरी को उनके बेटे ने कैमरे में देखा कि कुछ लोग प्लॉट पर लगा ताला तोड़ रहे हैं। उन्होंने मामले में कोतवाली सेक्टर-58 में मुकदमा दर्ज कराया। अगले दिन कुछ लोग वहां पहुंचे तब पुलिस ने दो आरोपियों को मौके से पकड़ लिया। पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने केदारनाथ के प्लॉट पर पौने चार करोड़ रुपये का लोन के लिए आवेदन किया था। फाइनेंस कंपनी कर्मचारी आरोपियों के साथ प्लॉट का सर्वे करने आए थे। इसी दौरान ताला तोड़ा गया था।
-
लॉस्ट रिपोर्ट दर्ज करा कर निकाले प्लॉट के असली कागजात
पुलिस का कहना है कि गिरोह का सरगना राकेश बिष्ट और देवाशीष हैं। राकेश ने देवाशीष को विवादित प्रापर्टी की जानकारी मांगी थी। दोनों मई 2023 से सेक्टर-55 स्थित इस प्लॉट को कब्जा करने की साजिश में लग गए। आरोपियों ने पहले केदारनाथ के बारे में पता किया, फिर उनके नाम पर ऑन लाइन एलएआर (लॉस्ट आर्टिकल रिपोर्ट) दर्ज कराई। इस रिपोर्ट में अपना मोबाइल नंबर दे दिया। इसी के आधार पर दोनों ने मिलकर नोएडा अथॉरिटी से प्लॉट के सारे कागजात हासिल कर लिए। फिर केदारनाथ के नाम से फर्जी सेल डीड और अन्य कागज तैयार कराए।
पीड़ित के नाम अवैध फर्म भी बनाई
दोनों ने अनिल भड़ाना, संजय शाह, कप्तान सिंह, नीरज झा, विभूति, नीतेश व अभिषेक से मिले और केदारनाथ के नाम फर्जी तरीके से एमएसएमई के लिए फर्म रजिस्टर्ड कराई और उन्हीं के नाम पर यूनियन बैंक में चालू खाता खुलवाया। इतेश से 50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से फर्म में ट्रांसफर कराए। इस रकम को आरोपियों ने बांट लिए और प्लॉट इतेश पोसवाल के नाम तीन करोड़ 75 लाख रुपये में बेच दिया, जबकि अभी इस प्लॉट की कीमत करीब 12 करोड़ रुपये है। इसी प्लॉट पर जालसाजों ने 3.75 करोड़ रुपये लोन लेने के लिए आदित्य बिरला फाइनेंस कंपनी में आवेदन भी किया। कंपनी का कर्मचारी प्लॉट का सर्वे करने 18 फरवरी को दोबारा आया था। तब आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
-
स्कूल में पढ़ाई के दौरान देखा था खाली प्लॉट
देवाशीष पहले जिस वनस्थली स्कूल में पढ़ाता था। कई वर्षों से वह इस प्लॉट को खाली देख रहा था। जब उसकी दोस्ती अन्य आरोपियों से हुई और खाली प्लॉट के नाम पर फर्जीवाड़ा करने की योजना बनाई तब इस खाली प्लॉट के बारे में अपने साथियों को बताया और फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। पुलिस की जांच में पता चला है कि सरगना राकेश बिष्ट को गिरोह के लोग बड़ा अधिकारी बताते थे। राकेश नोएडा प्राधिकरण व अन्य ऑफिस में भी खुद को बड़ा अधिकारी बताता था।