किसानों को अधिक मुआवजा देने का मामला, आरोपियों पर एफआईआर कराने के भी हैं निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा में किसानों को तय सीमा से ज्यादा मुआवजा देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नई एसआईटी का गठन करते हुए जांच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत की जांच भी होगी। पुरानी एसआईटी से मिली लीड के आधार पर नई एसआईटी आरोपियों की घेराबंदी करेगी। इसमें तथ्यों की पुष्टि करते हुए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर आदि कराने के भी निर्देश हैं।
कोर्ट ने नई एसआईटी के साथ फोरेंसिक विशेषज्ञ और आर्थिक अपराध विभाग (ईओडब्ल्यू) को भी शामिल करने के निर्देश हैं। इसमें यह भी संकेत दिए हैं कि करीब 20 मामलों में ज्यादा मुआवजे का वितरण किया गया। इन मामलों में आरोपी अधिकारियों, किसानों और संबंधित लोगों की सूची दी गई है।
अब अगली जांच इनको केंद्र में रखते हुए की जाएगी। आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत इकट्ठा करने के निर्देश हैं। जिन आरोपियों की जांच एसआईटी करेगी। उनके परिवार के सदस्य और संबंधी भी एसआईटी की रडार पर होंगे। यही वजह है कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों व आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों को सक्रिय रहने को कहा गया है। इनकी अर्जित संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच होगी।
प्राधिकरण के फैसलों में पारदर्शिता का अभाव
एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राधिकरण के फैसले बस कुछ ही लोगाें के बीच होते हैं। इसमें वह जैसा तय करते हैं वही आगे होता है। इसमें जनता की राय नहीं ली जाती है। जो भी नीतियां बनाई जाती हैं वह सबकुछ बिल्डरों के हितों के लिए बनाई जाती है।
नियमों के खिलाफ मुआवजा देने का है आरोप
किसानों को नियम के खिलाफ 100 करोड़ से अधिक मुआवजा देने का आरोप है। इसमें प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ भी मिलीभगत जाहिर हो रही है। एसआईटी की जांच में भी यह तथ्य अब सामने आने की बात की जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि किसी अधिकारी ने नहीं की। अब इन सभी बिंदुओं पर जांच के बाद ही यह पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगा कि इसमें कितना ज्यादा मुआवजा दिया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।