कैबिनेट में पास कराने के लिए परिवहन विभाग ने मसौदा तैयार किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति केवल सड़कों पर ईवी की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि बढ़ते बैटरी कचरे के निपटाने पर भी केंद्रित होगी। इसके लिए पहली बार व्यापक रूपरेखा तैयार की जा रही है। परिवहन विभाग की ओर से नई ईवी नीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि नई नीति मार्च तक लागू होगी। इससे पहले नई नीति के मसौदे को कैबिनेट में पास किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा नीति में बैटरी रीसाइक्लिंग और लिथियम-आयन बैटरियों के वैज्ञानिक निपटान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं जबकि एक ईवी की बैटरी औसत आठ साल चलती है। इसके बाद यह कचरे में बदल जाती है। इसमें जहरीले तत्व होते हैं। यही वजह है कि नई नीति बैटरी के दोबारा इस्तेमाल और निपटान के लिए पूरी ढांचा-व्यवस्था तैयार करेगी। सरकार की योजना है कि दिल्ली में बैटरी रीसाइक्लिंग को एक संगठित उद्योग का रूप दिया जाए जहां निजी कंपनियों, नगर निगम, शोध संस्थानों और चार्जिंग स्टेशन संचालकों की भूमिका तय हो। परिवहन विभाग ने 2030 तक 5,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाने का लक्ष्य रखा है। नए मसौदे में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वे काम करते हों, सुलभ हों और सुरक्षित हों।
ई-रिक्शा के लेकर नियम बनेंगे
वर्तमान में ई-रिक्शा की संख्या काफी बढ़ी है लेकिन इनके संचालन के नियम स्पष्ट नहीं हैं। नई नीति में शहरभर में ई-रिक्शा को लेकर रूट तय करने, संख्या नियंत्रित करने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में इन्हें व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाएगा। वहीं, नई नीति में सब्सिडी पूरी तरह खत्म नहीं होगी लेकिन अब इसका जोर कम होगा। ज्यादातर खरीदार सब्सिडी से ज्यादा गाड़ी की सुविधा और कम खर्च को प्राथमिकता देते हैं।