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लापरवाही दर लापरवाही : हादसे ने उजागर कर दी हकीकत

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सेक्टर-150 के बाद अब 94, डबल बेसमेंट की खोदाई कर छोड़ दिया था प्लॉट
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- प्राधिकरण ने निर्माण निगम से शुरू करवाया था निर्माण, 2022 में टेंडर निरस्त कर जब्त कर ली थी धरोहर राशि, तब से बंद पड़ी थी परियोजना

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर के बीच डबल बेसमेंट की खोदाई के बाद छोड़े गए प्लॉट में डूबकर एक और युवक की मौत ने नोएडा प्राधिकरण के दवों की हकीकत उजागर कर दी है। सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के बाद प्राधिकरण ने खतरनाक जगहों के लिए पुख्ता इंतजाम के दावे किए थे।
बुधवार हो हुए हादसे के बाद प्राधिकरण अधिकारियों का दावा है कि जिस प्लॉट में डूबकर निजी विश्वविद्यालय के छात्र की मौत हुई है वह तीन तरफ से तार से घिरा हुआ था। मौके पर निगरानी के लिए सुरक्षा गार्ड भी मौजूद थे। इन इंतजामों के बाद भी चार छात्र मौके पर कैसे पहुंच गए यह जवाब सामने नहीं आया है। प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि मौके पर निर्माण स्थल अभी उत्तर प्रदेश निर्माण निगम की निगरानी में है।
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हैबिटेट एंड कनवेंशन सेंटर का है प्लॉट
जिस प्लॉट में डूबने से छात्र की मौत हुई वह प्लॉट नोएडा प्राधिकरण के हैबिटेट एंड कनवेंशन सेंटर का है। जुलाई 2021 में निर्माण का जिम्मा निर्माण निगम को देकर प्राधिकरण ने काम शुरू कराया था। करीब 31 मंजिल की बिल्डिंग के निर्माण के लिए गहराई से खोदाई की गई थी। बेसमेंट से भी ज्यादा गहराई से खोदाई होने पर यहां नीचे से पानी तक निकलने लगा था। कुछ समय काम चला भी। लेकिन फिर बंद हो गया था। प्राधिकरण की तरफ से कहा गया कि निर्माण निगम की तरफ से काम सही से नहीं कराया गया। लगातार लापरवाही बरती रही थी। प्राधिकरण की मंजूरी के बगैर दूसरे ठेकेदारों को भी विभाजित कर देने का आरोप भी लगा। वर्ष 2022 में टेंडर निरस्त कर प्राधिकरण ने परियोजना की धरोहर राशि करीब 26 करोड़ रुपये जब्त कर ली थी। इसके बाद से परियोजना ठप है। प्राधिकरण व निर्माण निगम का विवाद आर्बिट्रेशन में है। तब से गहराई से की गई खोदाई में लगातार पानी भर रहा है।
2017 में तैयार हुआ था प्रारूप, 433 करोड़ थी अनुमानित लागत

सेक्टर-94 में करीब 25 एकड़ जमीन पर हैबिटेट एंड कनवेंशन सेंटर परियोजना का प्रारूप 2017 में तैयार हुआ था। जून-2020 से परियोजना को शुरू करने की कोशिशें हुई। करीब पांच बार टेंडर करने के बाद निर्माण एजेंसी के लिए यूपी निर्माण निगम का चयन हुआ था। डीपीआर के मुताबिक हैबिटेट की 31 मंजिल बिल्डिंग के लिए विमानन मंत्रालय से मंजूरी ली गई, सिस्मिक टेस्ट करवाए गए। अनुमान यह था कि पहले चरण में करीब 433.55 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके अलावा विद्युत यांत्रिक व अन्य काम को मिलाकर 500 करोड़ के आस-पास लागत आएगी। दूसरे चरण में होटल, पार्किंग और वाणिज्यिक निर्माण को 41 हजार वर्ग मीटर जमीन निजी हाथों में देने को तैयारी थी।



प्राधिकरण पुलिस की जांच का कर रहा इंतजार

हादसे की सूचना के बाद प्राधिकरण अधिकारी अस्पताल और मौके पर गए। अधिकारियों ने बताया कि मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची थी। यह प्लॉट प्राधिकरण के वर्क सर्कल-9 के क्षेत्र में आता है।



खतरनाक मोड़ और खाई की सूची में शामिल नहीं था यह प्लॉट

सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के बाद प्राधिकरण ने शहर में खोदाई के बाद खाली छोड़े गए खाईनुमा प्लॉट व खतरनाक मोड़ वाले 65 जगहों की सूची बनवाई थी। लेकिन सेक्टर-94 के बीच प्लॉट नंबर-4 व 5 को उसमें शामिल नहीं किया गया था। वहीं सूची में शामिल अन्य खतरनाक जगहों पर भी सुरक्षा इंतजाम अभी तक पुख्ता नहीं हो पाए हैं।



एसआईटी की रिपोर्ट का अब भी इंतजार

युवराज हादसे में की जांच के लिए शासन स्तर से एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने कई दिन नोएडा आकर जांच की थी। सैकड़ों लोगों के बयान दर्ज हुए थे। लेकिन युवराज की मौत मामले में अब तक एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक तौर पर आने की जानकारी नहीं हुई है। एसआईटी को अपनी रिपोर्ट शासन में सौंपनी थी।
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सेक्टर-94 में जिस प्लॉट में डूबने से छात्र की मौत हुई वहां पर उत्तर प्रदेश निर्माण निगम पहले निर्माण करवा रहा था। प्लॉट की मौजूदा स्थिति को लेकर विभागों से जानकारी मांगी गई है।-कृष्ण करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण।
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