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Noida News: नीमका चौकी इंचार्ज को हटाया, कसीनो की वसूली लिस्ट वायरल

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नीमका चौकी इंचार्ज को हटाया, कसीनो की वसूली लिस्ट वायरल

- पुलिस ने बताया सामान्य तबादला, वसूली सूची में पुलिस, नेता और पत्रकारों पर भी आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/जेवर। सोशल मीडिया पर यमुना एक्सप्रेसवे के पास दुकान में चलाए जा रहे कसीनो के वायरल वीडियो की जांच अभी पूरी नहीं हुई थी कि बुधवार को वसूली की सूची वायरल हो गई। सूची में कसीनो चलाने के लिए हेडकांस्टेबल से लेकर, नेता और पत्रकार समेत कई कर्मचारियों को दी गई रकम का ब्यौरा है। बुधवार को ही नीमका चौकी इंचार्ज लाखन सिंह को हटा दिया गया। हालांकि अधिकारियों ने दरोगा के तबादले को रूटीन बताया। वहीं कमिश्नरेट पुलिस की ओर से वायरल वीडियो और सूची की जांच डीसीपी ग्रेटर नोएडा साद मियां खान को सौंपी गई है। बुधवार को वह जांच करने मौके पर पहुंचे थे।
यमुना एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड के किनारे नीमका चौकी क्षेत्र के खुर्जा जेवर रोड पर बनी दुकानों में कसीनो चलाने एवं शराब परोसने का आरोप लगाते हुए वीडियो वायरल किया गया था। वीडियो में सात से आठ लोग जुआ खेलते दिख रहे हैं। इसमें इस तरह की गतिविधि से बड़ी वारदात की आशंका जाहिर की गई थी। इस मामले की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। अब कसीनो चलवाने के लिए थाने से लेकर एसीपी दफ्तर तक वसूली का आरोप लगाते हुए वसूली की सूची वायरल हुई है।
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इस सूची में जेवर कोतवाली में तैनात अधिकारी व कर्मचारी के नाम पर दो लाख बीस हजार, थाने में चालक के नाम पर 10 हजार, चौकी इंचार्ज के नाम पर 25 हजार, दो पत्रकारों के नाम पर 20 हजार, एसओजी के नाम पर 20 हजार, एक विधायक का करीबी कहे जाने वाले वाले युवा भाजपा नेता के नाम पर 25 हजार, हमराह के नाम पर 2500 रुपये, 112 नंबर हेल्पलाइन के नाम पर 2500 रुपये, एसीपी ऑफिस के नाम पर 50 हजार, एसीपी चालक के नाम पर 20 हजार रुपये की सूची वायरल की गई है। इसमें कुल लगभग 3 लाख रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है।


मुख्य आरोपी का नाम और नंबर भी किया शेयर

जांच के आदेश की सूचना मिलते ही लिस्ट वायरल करने वाले सोशल मीडिया पर मुख्य आरोपी का नाम और फोन नंबर तक शेयर कर दिया। कुछ लोगों का दावा है कि लिस्ट में जितने लोगों को पैसा दिया जा रहा था, सभी के फोन की डिटेल और कसीनो चलाने वाले व मुख्य आरोपी के फोन की डिटेल पुलिस निकाल सकती है। सभी आरोपी लगातार फोन से संपर्क में रहते थे।
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गौतमबुद्धनगर में पहले भी जारी हुई है इस तरह की सूची
करीब दो साल पहले पुलिस अधिकारियों की सूची इसी तरह वायरल हुई थी। इसमें एसओजी से लेकर थाना पुलिस तक के अधिकारियों पर वसूली के आरोप लगे थे। सूची वायरल होने के बाद मामूली कार्रवाई हुई थी।
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