-महिलाएं एडवांस स्टेज में उपचार के लिए पहुंचती हैं अस्पताल
-40 साल की उम्र के बाद हर महिला की मैमोग्राफी जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी सामान्य बनती जा रही है। इस तरह के मामले तेजी से बढ़ रहे है। भारत में अमेरिका की तुलना में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर कम उम्र में देखा रहा है। यह जानकारी एम्स दिल्ली के जेएल सभागार में बुधवार को ‘स्तन कैंसर जागरूकताः जांच एवं उपचार, जागरूक रहे’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में डॉक्टरों की ओर से दी गई।
पैनल चर्चा में बताया गया कि अमेरिका में औसतन 60 वर्षीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले मिलते है। जबकि भारत में औसतन 48 की उम्र में ब्रेस्ट कैंसर के मामले महिलाओं में देखने को मिल रहे है। महिलाएं जागरूकता के अभाव में एडवांस स्टेज में ब्रेस्ट कैंसर के उपचार के लिए पहुंचती है। पैनल चर्चा में शामिल डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कैंसर के लक्षणों के संबंध में बताया कि महिलाओं की ब्रेस्ट साइज में बदलाव होने, खून का रिसाव, ब्रेस्ट पर लाली और एक्जिमा होने सहित दूसरे लक्षणों से ब्रेस्ट कैंसर की पहचान की जा सकती है। हर गांठ कैंसर नहीं होती है। डॉ. अनीता धर ने कहा कि खुद से स्क्रीनिंग करके ब्रेस्ट कैंसर को एडवांस स्टेज में पहुंचने से बचाया जा सकता है। बढ़ती उम्र में ब्रेस्ट कैंसर को रोक नहीं सकते है। मगर, जल्दी पहचान कर उपचार जरूर शुरू किया जा सकता है। इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते है।
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40 की उम्र के बाद करानी चाहिए मैमोग्राफी
पैनल में शामिल डॉ. सुरभि व्यास ने बताया कि 40 साल की उम्र के बाद हर महिला को मैमोग्राफी करानी चाहिए। चाहे महिला को तकलीफ है या नहीं। दो साल में एक बार में मैमोग्राफी जरूर करानी चाहिए। जबकि 50 साल की उम्र के बाद हर साल मैमोग्राफी करानी चाहिए। अगर किसी महिला की मैमोग्राफी रिपोर्ट सामान्य है। लेकिन उसको तकलीफ है तो ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
टिश्यू से चलता है कैंसर का पता
ब्रेस्ट कैंसर में बायोप्सी की जांच कराने की आवश्यकता को लेकर डॉ. संदीप माथुर ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर की गांठ में से टिश्यू लिया जाता है। उसमे पता चलता है कि यह गांठ कैंसर की है या नहीं। इस जांच से कैंसर के प्रकार और हार्मोन की स्थिति के बारे में भी पता चलता है। कैंसर की स्थिति के आधार पर डॉक्टर मरीज के उपचार की प्रक्रिया का निर्धारण करते है। पैनल में शामिल डॉ. सुभाष गुप्ता ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं को होता है। यह एक मिथक है। यह पुरुषों को भी हो सकता है। इस पैनल चर्चा का हिस्सा डॉ. अतुल बत्रा भी शामिल थे।