नई दिल्ली। दि नेशनल कंपनी लॉ एपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने सोमवार को दिल्ली जिमखाना क्लब की जनरल कमेटी को निलंबित कर दिया। ट्रिब्यूनल ने इसके साथ ही केंद्र सरकार को क्लब के कार्य की देखरेख के लिए प्रशासक नियुक्त करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने अगले आदेश तक नई सदस्यता मंजूर करने पर भी रोक लगा दी है।
ट्रिब्यूनल ने 57 पन्नों के कड़े आदेश में कहा कि ये क्लब अंग्रेजी शासन की निशानी है और अपने खास चरित्र की आड़ में इसकी सदस्यता केवल खास लोगों तक सीमित कर दी गई है। यह भेदभावपूर्ण है और संविधान के तहत सामाजिक न्याय, समानता और अवसर प्रदान के उद्देश्य के विपरीत है।
यह आदेश कंपनी मामलों के मंत्रालय तथा क्लब की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है। दोनों ने ही ट्रिब्यूनल के 2020 के एक अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। मंत्रालय ने क्लब के कामकाज में गड़बड़ी का हवाला देते हुए जनरल कमेटी से अधिकार वापस लेने की मांग की थी।
ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस बंसी लाल भट की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अंतरिम आदेश को यथावत रखते हुए कहा कि पहली नजर में ये लगता है कि क्लब का कामकाज जिस तरह किया जा रहा था जब जनहित के खिलाफ है। इस नजरिये से प्रधान पीठ के अंतरिम आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने आदेश में मामूली संशोधन किया है।
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार के तर्क में दम है और क्लब का कामकाज कानून के अनुरूप चलाने के लिए अंतरिम आदेश का प्रभावी व पर्याप्त तरीके से लागू किया जाना जरूरी है। इसलिए जनरल कमेटी को निलंबित किया जाता है और प्रशासक नियुक्त करने का आदेश केंद्र सरकार को दिया जाता है। अगले आदेश तक नई सदस्यता स्वीकार करने पर भी रोक रहेगी। पीठ ने कहा कि ये संशोधित आदेश दो सप्ताह में प्रभावी होना चाहिए यानि तब तक प्रशासक की नियुक्ति हो जानी चाहिए। - एजेंसी